अवतार सिंह सैनी भारत के एक बेहद प्रतिष्ठित और दूरदर्शी माइक्रोप्रोसेसर डिजाइनर, इलेक्ट्रिकल इंजीनियर और टेक लीडर थे। उन्हें वैश्विक तकनीकी जगत और विशेष रूप से इंटेल कंपनी में उनके क्रांतिकारी योगदान के लिए जाना जाता है। कंप्यूटर जगत को बदलने वाले मशहूर ‘पेंटियम प्रोसेसर’ के विकास और डिजाइन का नेतृत्व उन्होंने ही किया था, जिसकी वजह से उन्हें इस चिप का मुख्य सूत्रधार माना जाता है।

अवतार सैनी ने अपनी प्रारंभिक उच्च शिक्षा मुंबई के प्रसिद्ध वीरमाता जीजाबाई टेक्निकल इंस्टिट्यूट (VJTI) से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में स्नातक डिग्री ली थी। इसके बाद वे आगे की पढ़ाई के लिए अमेरिका चले गए, जहां उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ मिनेसोटा से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में अपनी मास्टर डिग्री हासिल की।
उन्होंने इंटेल कंपनी में लगभग 22 वर्षों (1982 से 2004) तक काम किया और तकनीकी क्षेत्र में नए आयाम स्थापित किए। 1980 के दशक में उन्होंने Intel 80386 और Intel 80486 जैसे शुरुआती और महत्वपूर्ण प्रोसेसर्स पर सर्किट और लॉजिक डिजाइनर के रूप में काम किया। 1989 में उन्हें पेंटियम प्रोसेसर डिजाइन टीम का को-लीडर बनाया गया। उन्होंने मार्च 1993 में इसकी सफल लॉन्चिंग और बड़े पैमाने पर उत्पादन की पूरी जिम्मेदारी संभाली, जिसने पर्सनल कंप्यूटर (PC) के युग में क्रांति ला दी।

उनकी काबिलियत को देखते हुए 1994 में उन्हें इंटेल के सांता क्लारा माइक्रोप्रोसेसर डिवीजन का जनरल मैनेजर बनाया गया। बाद में 1999 से 2004 तक वे इंटेल साउथ एशिया के कंट्री मैनेजर और डायरेक्टर रहे। उन्होंने बेंगलुरु में इंटेल के अत्याधुनिक रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेंटर को स्थापित करने में मुख्य भूमिका निभाई, जिसने भारत में सेमीकंडक्टर और चिप डिजाइन के पूरे इकोसिस्टम को मजबूत किया।

माइक्रोप्रोसेसर डिजाइनिंग और तकनीकी विकास के क्षेत्र में उनके नाम पर 7 वैश्विक पेटेंट्स दर्ज हैं। 2004 में इंटेल छोड़ने के बाद उन्होंने मोंटालवो सिस्टम्स में भारत ऑपरेशंस के निदेशक के रूप में काम किया और कई बड़ी तकनीकी कंपनियों के लिए एक स्वतंत्र सलाहकार की भूमिका भी निभाई।

अवतार सैनी एक अनिवासी भारतीय थे। उनके परिवार में उनका एक बेटा और एक बेटी हैं, जो अमेरिका में स्थायी रूप से कार्यरत हैं। साल 2021 के आसपास एक लंबी बीमारी के कारण उनकी पत्नी का निधन हो गया था, जिसके बाद वे मुंबई के चेंबूर इलाके में अकेले रहते थे।

वे साइकिल चलाने के बेहद शौकीन थे। 28 फरवरी 2024 की सुबह करीब 5:50 बजे जब वे नवी मुंबई के पाम बीच रोड पर अपने साथियों के साथ साइकिलिंग कर रहे थे, तब पीछे से आ रही एक तेज रफ्तार कैब ने उन्हें टक्कर मार दी। अस्पताल ले जाते समय रास्ते में ही उन्होंने दम तोड़ दिया। निधन के समय उनकी आयु 68 वर्ष की थी।