Our History / हमारा इतिहास
पंजाबी
"पंजाबी" जब हम ये शब्द सुनते हैं तो हमारी कल्पना में क्या चित्र बनता है..? कौन होते हैं पंजाबी..? क्या यह कोई जाति है.. अथवा वर्ण है..? "पंजाबी" सुनते ही किसी के भी मन में जो भाव चित्र बनते हैं… वो...
सप्त सिंधु/ पंचनद/पंजाब का इतिहास
पंजाब परंपरागत रूप से, पंजाबी पहचान मुख्य रूप से भाषाई, भौगोलिक और सांस्कृतिक है जो पंथ/मज़हब से स्वतंत्र है। यह उन लोगों को संदर्भित करती है जो पंजाब क्षेत्र में रहते हैं या/और जिनकी मातृभाषा पंजाबी...
कुलदेवी हिंगलाज माता
पंजाबियों की कुलदेवी हिंगलाज माता पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में एक प्राकृतिक गुफा में विराजित है जिन्हें हिंगुला देवी, हिंगुला की देवी, लाल देवी, कोट्टारी या कोटावी देवी, माता हिंगलाज अथवा...
आदि पुरुष श्री अरूट जी महाराज
अरूट राय जी का जन्म प्रभु श्री राम के पुत्र लव की वंशबेल में लाहौर के शासक राजा कालराय जी के यहां हुआ। उनके दो पुत्र थे – सोढ़ी राय और अरूट राय। अरूट राय का स्वभाव शांत और भक्ति भाव से भरा था और वे...
मूल मंत्र
इक ओंकार, सति नामु, करता पुरखु, निरभउ,निरवैरु, अकाल मूरति, अजूनी सैभं, गुर प्रसादि।। मूल मंत्रकेवल एक ही ईश्वर है, शाश्वत सत्य ही उनका नाम है, वे सृष्टिकर्ता हैं, भय रहित, घृणा रहित, निराकार, जन्म...
Partition of India / भारत विभाजन
भारत पाक विभाजन
लोमहर्षक तुस्सी कट्टो बापूजी, मैं मुसलमानी नहीं बनांगी… दिल दहलाने वाली सत्य घटना… 1 बाप, 7 बेटियां और गुजरांवाला का एक कुआं… गुजरांवाला, पाकिस्तान पंजाब का एक शहर। सरदार हरि सिंह नलवा की जमीन। यहां...
Our Gurus
गुरु नानक देव जी
भारत की धरा पर समय–समय पर ऐसी अनेक विभूतियों ने जन्म लिया है जिनके उपदेशों तथा कर्मों ने विश्व को एक नया मार्ग दिखाया है। मध्यकाल में ज्ञान की चेतना को जागृत करने वाले धर्मसुधारक, समाजसुधारक,...
गुरु अंगददेव जी
"नउ निधि अमृतु प्रभ का नामु, देही महि इस का बिस्रामु" सिख गुरु परम्परा में गुरु अंगददेव जी दूसरे गुरु के रूप में गुरु नानक देव जी के उत्तराधिकारी बने। उनके जन्म दिनांक और जन्म स्थान में मतभेद है। एक...
गुरु अमरदास जी
दादा दाता एक है, सबको देवनहार।देंदा तोट न आवै, अगणित भरे भंडार॥ गुरु अमरदास जी (1479–1574) सिख पंथ के तीसरे गुरु थे। उनका जन्म 5 मई 1479 को अमृतसर के बासरके गाँव में माता बख्त कौर जिन्हें सुलखनी,...
गुरु राम दास जी
हरि हरि नामु मै हरि मनि भाइिआ।वडभागी हरि नामु धिआइिआ।। गुरु राम दास (1534–1581) सिख धर्म के दस गुरुओं में से चौथे गुरु थे । उनका जन्म 9 अक्टूबर, 1534 को लाहौर के चूना मंडी में एक गरीब हिंदू परिवार...
गुरु अर्जन देव जी
गुरु अर्जन देव (1563–1606)पंथ पर बलिदान होने वाले प्रथम बलिदानी, सिक्ख पंथ के 5वें गुरु, गुरु अर्जन देव जी का जन्म 15 अप्रैल 1563 को गोइंदवाल में हुआ था। वे सिखों के चौथे गुरु, गुरु रामदास जी के...
गुरु हरगोबिंद सिंह जी
गुरु हरगोबिंद सिंह (1595-1644) सिखों के छठे गुरु थे, जिन्होंने सिख पंथ को एक योद्धा समुदाय में बदला और 'मीरी-पीरी' (सैन्य व आध्यात्मिक शक्ति) के सिद्धांत की स्थापना की। गुरु अर्जुन देव जी के पुत्र...
श्री गुरु हरराय साहिब जी
सिखों के सातवें गुरु, श्री गुरु हरिराय अथवा हरराय साहिब जी (1630-1661) एक शांतिप्रिय, दयालु और करुणामयी आध्यात्मिक गुरु थे।हरराय जी का जन्म 16 जनवरी, 1630 को कीरतपुर साहिब, रोपड़ (पंजाब) में पिता...
गुरु हरकिशन साहिब जी
सिखों के आठवें गुरु श्री गुरु हरकिशन साहिब जी थे। उन्हें 'बाल गुरु' और 'बाला पीर' के नाम से भी जाना जाता है। उनका जन्म 7 जुलाई 1656 कीरतपुर रोपड़ में पिता गुरु हरराय एवं माता किशन कौर के दूसरे पुत्र...
गुरु तेग बहादुर जी
गुरु तेग बहादुर सिख पंथ के नौवें गुरु थे। उनका जन्म 21 अप्रैल 1621 (वैशाख, कृष्ण पंचमी संवत 1678) को माता नानकी और छठे सिख गुरु, गुरु हरगोबिंद के यहाँ अमृतसर में हुआ था। तेग बहादुर को उनके तपस्वी...
गुरु गोविंद सिंह
गुरु गोविंद सिंह जी (22 दिसंबर 1666 – 7 अक्टूबर 1708) सिख धर्म के दसवें और अंतिम मानव गुरु थे। अपने पश्चात् उन्होंने गुरु ग्रंथ साहिब को शाश्वत गुरु के रूप में घोषित किया। गुरु गोविंद सिंह जी का...
















