निकेश अरोड़ा एक प्रसिद्ध भारतीय-अमेरिकी अरबपति व्यवसायी और दुनिया की सबसे बड़ी स्वतंत्र साइबर सुरक्षा कंपनी पालो अल्टो नेटवर्क्स के अध्यक्ष और मुख्य कार्यकारी अधिकारी हैं। वह जून 2018 से इस पद पर कार्यरत हैं और उनके मजबूत नेतृत्व में कंपनी का राजस्व 18 अरब डॉलर से 100 अरब डॉलर के पार पहुंच गया है।
9 फरवरी, 1968 को गाजियाबाद में एक मध्यमवर्गीय परिवार में आपका जन्म हुआ था। उनके पिता भारतीय वायु सेना में अधिकारी थे। उन्होंने दिल्ली के एयर फोर्स स्कूल से अपनी स्कूली पढ़ाई पूरी की और फिर आईआईटी बीएचयू से 1989 में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बी.टेक की डिग्री हासिल की। इसके बाद वे 1990 में उच्च शिक्षा के लिए पहली बार अमेरिका गए तब उनके पास बेहद सीमित संसाधन थे पर अथक परिश्रम से उन्होंने नॉर्थईस्टर्न यूनिवर्सिटी से एमबीए और बोस्टन कॉलेज से फाइनेंस में एमएस की डिग्री प्राप्त की।
करियर की शुरुआत में उन्हें एक दो नहीं करीब 400 कंपनियों से रिजेक्शन का सामना करना पड़ा था जिससे कोई भी व्यक्ति टूट जाता लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने 2004 में गूगल जॉइन किया और लगभग 10 वर्षों तक वहां काम किया। वे गूगल में मुख्य व्यवसाय अधिकारी के पद तक पहुंचे और कंपनी के राजस्व को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई।
2014 में वे जापानी निवेश दिग्गज सॉफ्टबैंक समूह में शामिल हुए। उन्हें सॉफ्टबैंक के संस्थापक मासायोशी सोन का उत्तराधिकारी माना जा रहा था, हालांकि उन्होंने 2016 में वहां से इस्तीफा दे दिया।
2018 में पालो अल्टो नेटवर्क्स का सीईओ बनने के बाद उन्होंने कंपनी का पूरा ध्यान क्लाउड सिक्योरिटी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीकों पर केंद्रित किया, जिससे कंपनी को अभूतपूर्व सफलता मिली।
वर्तमान में वे उबर टेक्नोलॉजीज के गैर-कार्यकारी निदेशक और स्विट्जरलैंड की लक्जरी सामान बनाने वाली कंपनी रिचमोंट के प्रमुख स्वतंत्र निदेशक के रूप में भी सेवा दे रहे हैं।
निकेश अरोड़ा अमेरिका में सबसे अधिक वेतन पाने वाले सीईओ की सूची में शामिल हैं। वित्तीय वर्ष 2023 में उनका कुल सैलरी पैकेज लगभग 1.5 अरब डॉलर से अधिक आंका गया है जो गूगल सीईओ सुंदर पिचाई से भी अधिक है।
निकेश अरोड़ा को अमेरिकन काउंसिल ऑन जर्मनी (ACG) द्वारा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस युग में वैश्विक स्तर पर डिजिटल लचीलापन और साइबर सुरक्षा बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए जॉन जे. मैक्क्लॉय पुरस्कार दिया गया।
अमेरिका के शीर्ष व्यापारिक नेताओं और अर्थशास्त्रियों द्वारा मिलकर बनाई गई एक गैर-लाभकारी और गैर-पक्षपाती सार्वजनिक नीति संस्था आर्थिक विकास समिति (CED) द्वारा उनके साहसिक और नवोन्मेषी नेतृत्व के लिए प्रतिष्ठित नेतृत्व पुरस्कार 2024 आईबीएम के सीईओ अरविंद कृष्णा के हाथों से मिला।
तकनीकी उद्योग और साइबर सुरक्षा क्षेत्र में उनकी दूरदर्शी नीतियों के लिए उन्हें वार्षिक गाला समारोह में “टेक विज़नरी अवार्ड 2023” से सम्मानित किया गया।
भारत के प्रतिष्ठित इकोनॉमिक टाइम्स (ET) कॉरपोरेट एक्सीलेंस अवार्ड्स में उन्हें वैश्विक स्तर पर भारतीय प्रतिभा का डंका बजाने के लिए ग्लोबल इंडियन अवार्ड 2015 सम्मान से नवाजा गया था।
निकेश अरोड़ा ने अपनी मातृसंस्था IIT (BHU) वाराणसी को
2 मिलियन (लगभग ₹16 करोड़ से अधिक) की भारी-भरकम राशि दान में दी है। इस राशि से ‘IIT (BHU) फाउंडेशन एक्सेस फंड’ और ‘अलुमनाई फंड’ की स्थापना की गई है, जिसके जरिए आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद भारतीय छात्रों को मुफ्त उच्च शिक्षा और स्कॉलरशिप (77 से अधिक छात्रवृत्तियां) प्रदान की जाती हैं।
सॉफ्टबैंक के अध्यक्ष और सीओओ के रूप में अपने कार्यकाल (2014-2016) के दौरान, उन्होंने भारत के स्टार्टअप क्षेत्र में अरबों डॉलर के निवेश की रूपरेखा तैयार की थी। उन्होंने ओला (Ola), स्नैपडील (Snapdeal), और ओयो (OYO) जैसी भारतीय कंपनियों में शुरुआती और बड़े निवेशों को व्यक्तिगत रूप से मंजूरी दी थी, जिससे भारतीय टेक स्टार्टअप्स को वैश्विक पहचान मिली।
निकेश अरोड़ा की पहली पत्नी का नाम किरण है। निकेश और किरण का वैवाहिक जीवन कई वर्षों तक चला, लेकिन बाद में आपसी मतभेदों के कारण दोनों का तलाक हो गया। उनसे उनकी एक बेटी है जिसका नाम आयशा अरोड़ा हैं। फरवरी 2026 में, जोधपुर के उम्मेद भवन पैलेस में ब्रिटिश अरबपति बिजनेसमैन के बेटे जैक ह्यूजेस के साथ उनकी भव्य शाही शादी काफी चर्चा में रही थी।
निकेश अरोड़ा की दूसरी पत्नी आयशा थापर भारत के प्रसिद्ध व्यावसायिक घराने ‘थापर ग्रुप’ के संस्थापक करम चंद थापर की पोती और उद्योगपति विक्रम थापर की बेटी हैं। उनकी शादी जुलाई 2014 में इटली में एक भव्य समारोह में हुई थी। यह दोनों की ही दूसरी शादी है। निकेश और आयशा थापर का एक बेटा है जिसका जन्म 2 जून 2015 को हुआ था।
