रजनी बेक्टर क्रेमिका बिस्किट्स
कई बिजनेसमैन ऐसे हैं, जो बंटवारे के बाद पाकिस्तान से भारत आए। इनमें से एक हैं रजनी बेक्टर। कराची में जन्मी रजनी की 17 वर्ष की आयु में लुधियाना के एक कारोबारी परिवार में शादी कर दी गयी। शादी के बाद भी उन्होंने पढ़ाई जारी रखी और जब उनके बच्चों का एडमिशन बोर्डिंग स्कूल में हुआ, तो उन्होंने पंजाब कृषि विश्वविद्यालय में एक बेकरी कोर्स में दाखिला लिया और अपने खाली समय का इस्तेमाल खाना पकाने की कला को और निखारने के लिए किया। ये उनके सफल कारोबारी बनने के सफर का पहला अहम कदम साबित हुआ।
1978 में मात्र ₹20,000 की शुरुआती पूंजी के साथ अपने पति धर्मवीर बेक्टर की मदद से उन्होंने लुधियाना, पंजाब में अपने घर के पीछे एक रसोईघर में आइसक्रीम, ब्रेड और बिस्कुट बनाने का काम शुरू किया था। चार दशक बाद उनका सपना साकार हुआ जब उनका शुरू किया गृह उद्योग “मिसेज बेक्टर्स फूड स्पेशलिटीज” 2020 में ₹7,000 करोड़ से अधिक की वैल्यू वाली एक लिस्टेड पब्लिक लिमिटेड कंपनी का रूप ले चुका है।
वर्तमान में क्रेमिका के बिस्किट्स भारत के 23 से अधिक राज्यों में 5,50,000 से ज्यादा रिटेल आउटलेट्स पर उपलब्ध हैं। क्रेमिका भारतीय सेना की कैंटीन (CSD कैंटीन) और भारतीय रेलवे को बिस्किट सप्लाई करने वाली एक प्रमुख और स्वीकृत ब्रांड है। यह भारत से बिस्किट निर्यात करने वाली दूसरी सबसे बड़ी कंपनी है, जिसके उत्पाद दुनिया के 60 से अधिक देशों में भेजे जाते हैं।
व्यापार जगत में उनके इसी असाधारण योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें साल 2021 में पद्म श्री से सम्मानित किया था।
अनूप बेक्टर, कंपनी की संस्थापक रजनी बेक्टर के बेटे हैं और वर्तमान में मिसेज बेक्टर्स फूड स्पेशलिटीज लिमिटेड में प्रबंध निदेशक की भूमिका बखूबी संभाल रहे हैं। वर्तमान में वे अपने बेटों ईशान बेक्टर और सुवीर बेक्टर, जो कंपनी में होल-टाइम डायरेक्टर हैं, के साथ मिलकर कंपनी के प्रीमियम बेकरी बिजनेस को और आगे बढ़ा रहे हैं।
