विनोद खोसला एक प्रसिद्ध भारतीय-अमेरिकी अरबपति व्यवसायी, निवेशक और प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ हैं। वे वैश्विक तकनीकी जगत, विशेषकर सिलिकॉन वैली की सबसे प्रभावशाली हस्तियों में गिने जाते हैं। वे प्रसिद्ध कंप्यूटर हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर कंपनी सन माइक्रोसिस्टम्स (Sun Microsystems) के सह-संस्थापक हैं। इसके अलावा वे खोसला वेंचर्स (Khosla Ventures) नामक वेंचर कैपिटल फर्म के संस्थापक भी हैं।
उनका जन्म 28 जनवरी 1955 को पुणे, भारत में एक सैन्य परिवार में हुआ था। उन्होंने आईआईटी दिल्ली से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बी.टेक किया। फिर कार्नेगी मेलन यूनिवर्सिटी से बायोमेडिकल इंजीनियरिंग में मास्टर डिग्री ली और स्टैनफोर्ड ग्रेजुएट स्कूल ऑफ बिजनेस से एमबीए की शिक्षा पूरी की।
उन्होंने 1982 में एंडी बेचटोल्शेम, बिल जॉय और स्कॉट मैकनीली के साथ मिलकर सन माइक्रोसिस्टम्स नाम की ऐतिहासिक कंप्यूटर कंपनी की शुरुआत की। वे करीब 18 साल तक दिग्गज फर्म ‘क्लाइनर पर्किन्स’ में जनरल पार्टनर रहे। 2004 में उन्होंने अपनी खुद की फर्म खोसला वेंचर्स शुरू की, जो एआई, बायोमेडिकल, रोबोटिक्स, स्वच्छ ऊर्जा और सस्टेनेबल फूड जैसे अनूठे क्षेत्रों में निवेश करती है।
उनकी फर्म खोसला वेंचर्स 2019 में OpenAI (ChatGPT) बनाने वाली कंपनी में निवेश करने वाली पहली वेंचर कैपिटल फर्म बनी। उनका अनुमान है कि आने वाले समय में एआई दुनिया के करीब 80% आर्थिक काम और नौकरियों की जगह ले लेगा, जिससे स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा जैसी बुनियादी जरूरतें बेहद सस्ती या मुफ्त हो सकेंगी। उन्होंने भारतीय आईटी सेक्टर और उद्यमियों को भी पारंपरिक सेवाओं को छोड़कर एआई आधारित समाधानों को अपनाने की सलाह दी है।
वे दुनिया के अमीरों की सूची ‘गिविंग प्लेज’ के शुरुआती हस्ताक्षरकर्ताओं में से हैं, जिसके तहत वे अपनी संपत्ति का बड़ा हिस्सा दान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। कोविड-19 महामारी के दौरान उन्होंने भारत में अस्पतालों के लिए ऑक्सीजन और ’10 Bed ICU’ प्रोजेक्ट्स के माध्यम से भारी वित्तीय मदद भेजी थी।संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) द्वारा उन्हें ‘चैंपियंस ऑफ द अर्थ’ पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है।
