जन-जन के प्रिय, मृदुभाषी और कुशल मार्गदर्शक श्री राजकुमार भाटिया जी के अत्यंत शानदार एवं कुशल नेतृत्व में ‘पंजाबी गौरव महोत्सव’ का भव्य आयोजन संपन्न हुआ।
★ शौर्य, इतिहास और ‘विकसित भारत @2047’ का संकल्प:
लॉरेंस रोड स्थित ‘हेरीटेज ग्रैंड’ में 30 जून को पंजाबी 109 प्रतिष्ठित संस्थाओं के तत्वावधान में आयोजित इस ऐतिहासिक महोत्सव ने सफलता के नए कीर्तिमान स्थापित किए।
: यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के ‘विकसित भारत @2047’ के विजन को समर्पित – इस कार्यक्रम में लगभग 3000 से ज्यादा पंजाबियों ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई।
★ इस विशाल जनसमूह ने एक साथ मिलकर अपनी अटूट एकजुटता, समृद्ध संस्कृति और गौरव का शंखनाद किया। इस अभूतपूर्व आयोजन को ऐतिहासिक बनाने के लिए सभी सहयोगियों और आगंतुकों का सहृदय आभार!
★ *कार्यक्रम की रूपरेखा और मुख्य आयोजक (Program Organizer) व अध्यक्षता *श्रीमती किरण चोपड़ा जी (निर्देशिका व संचालिका, पंजाब केसरी) ने की।
★ “इस मंच पर मुख्य अतिथि के रूप में माननीय मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता जी, राज्यसभा के नवनिर्वाचित सांसद आदरणीय श्री तरुण चुघ जी, दिल्ली प्रदेश भाजपा अध्यक्ष व माननीय सांसद श्री हर्ष मल्होत्रा जी, और माननीय सांसद श्रीमती बांसुरी स्वराज जी उपस्थित रहीं। साथ ही, माननीय विधायक श्री करनैल सिंह जी, श्री योगेंद्र चंदोलिया जी, श्री रामवीर सिंह विधूड़ी जी एवं श्री राम कुमार गुप्ता जी सहित पंजाबी समाज की सभी विशिष्ट, अति-विशिष्ट व कर्मठ विभूतियों ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई।”
### ⚔️ महोत्सव का मूल संदेश (संक्षिप्त परिचय)-
: मंच पर उपस्थित सभी आदरणीय व्यक्तियों की मूल भावना यही थी कि पंजाबियों ने मानव इतिहास में हमेशा सर्वश्रेष्ठ और अभूतपूर्व योगदान दिए हैं।
: इस महोत्सव का मूल संदेश और वीर रस की गूंज, पंजाबी संस्कृति व इतिहास की उस अमर चेतना को दर्शाती है जो जन-जन को प्रेरणा, ऊर्जा और जीवन का वास्तविक महत्व सिखाती है:
संक्षिप्त में दोहा-
धर्म हेतु जो कट मरे, झुके न अत्याचारी।
सिंह सरीखे सूरमा, गाए दुनिया सारी॥
श्री गुरुग्रंथ साहिब जी अमर, शिक्षा और प्रकाश।कण-कण में ऊर्जा भरे, काटे सब दुःख-पाश॥
चार लाल कुर्बान कर, दशम पिता मुस्काए।
हर सुत में निज सुत प्रिये, गौरव गाथ सिखाए॥
शीश कटे पर धर्म न छोड़े, यही रीति सिखलाए।
सकल जगत को वीरता, जग का पाठ पढ़ाए॥
(S.R. Kapoor)
### अतिथियों के मुख्य वैचारिक बिंदु:
### 1. श्री राजकुमार भाटिया जी (माननीय विधायक, आदर्श नगर)
• वैचारिक क्रांति: “जब हम अपने ही देश भारत में एक जगह से दूसरी जगह आए, तो हम ‘शरणार्थी’ कैसे हुए? पाकिस्तान तो बाद में बना, पहले तो यह अखंड भारत ही था!”
• बड़ी मांग: उन्होंने पुरजोर शब्दों में मांग उठाई कि दिल्ली की जिन भी कॉलोनियों के आगे ‘शरणार्थी’ (Refugee) शब्द लिखा है, उसे तुरंत हटाया जाना चाहिए। उनके इस ओजस्वी वक्तव्य ने उपस्थित जनसमूह को आत्मविभोर कर दिया।
### 2. श्री हर्ष मल्होत्रा जी (माननीय सांसद एवं दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष, भाजपा)
• राष्ट्र निर्माण में योगदान: उन्होंने पंजाबी समाज के पुरुषार्थ और कर्मठता की सराहना करते हुए कहा कि विभाजन की विभीषिका झेलने के बाद भी इस समाज ने बिना किसी के आगे हाथ फैलाए, अपनी कड़ी मेहनत के दम पर खुद को खड़ा किया और देश के विकास में रीढ़ की हड्डी बने।
### 3. श्री तरुण चुघ जी (माननीय राज्यसभा सांसद)
• गहरी पकड़: पंजाबी संस्कृति और इतिहास पर अपनी गहरी पकड़ से उन्होंने श्रोतागणों को मंत्रमुग्ध किया। उन्होंने याद दिलाया कि इतिहास में जब भी मानवता और न्याय की बात आई है, पंजाबियों ने कभी मैदान नहीं छोड़ा और हमेशा अडिग रहे।
### 4. श्रीमती किरण चोपड़ा जी (प्रोग्राम ऑर्गेनाइजर एवं निर्देशिका, पंजाब केसरी)
• मुख्य घोषणा व बड़ी पहल: समाज को आगे बढ़ने का संदेश देते हुए उन्होंने मंच से घोषणा की—” प्रधानमंत्री मोदी जी के’विकसित भारत @ 2047’* के सपने को पूरा* करने में जो भी पंजाबी भाई-बहन देश के लिए कोई भी महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं, वे सीधे मुझसे आकर मिलें। उनके इस सराहनीय कार्य का पूरा विवरण और फोटो हम पंजाब केसरी अखबार में प्रमुखता से प्रकाशित करेंगे।”*
###5. श्रीमती रेखा गुप्ता जी (माननीय मुख्यमंत्री)
• विकास और समर्पण: “दिल्ली ने आज विकास की जो गति पकड़ी है, उसके पीछे चौबीसों घंटे का समर्पण, निरंतर सेवा की चाह और देवतुल्य कार्यकर्ताओं का आशीर्वाद है।”
• सच्चे पंजाबी की परिभाषा: पंजाबियों की आन-बान-शान बढ़ाते हुए उन्होंने कहा—”हर वो व्यक्ति पंजाबी है जिसका दिल बड़ा है, जो दिन-रात कड़ी मेहनत करता है और देश की तरक्की के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर कर देता है। इसी नाते, मैं भी एक पंजाबी हूँ!”
निष्कर्ष:
: यह अमर इतिहास संपूर्ण मानव जाति के लिए सबसे उज्ज्वल उदाहरण है कि अत्याचारी और राक्षसी प्रवृत्ति के दुश्मनों के आगे कभी घुटने नहीं टेकने हैं।
: हमारे 10 महान सिख गुरु, चार साहबजादे और श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की जीवंत शिक्षाएं हमें यही सीख देती हैं “कि स्वाभिमान की रक्षा के लिए चाहे शीश कटवाना पड़ जाए, पर धर्म के मार्ग से कभी पीछे नहीं हटना है।”
जय जय प्रभु श्री सीताराम 🇳🇪💐
भारत माता की जय
