देश भर में जनगणना का काम शुरू हो चुका है। इस बार जातिगत जनगणना भी हो रही है। इस जातिगत गणना का फॉर्म भरते हुए प्रत्येक पंजाबी को दो बातों का विशेष रूप से ध्यान रखना है:

✓ जाति: केवल “खत्री” लिखें
✓ भाषा: केवल “पंजाबी” लिखें

  1. पहला, मन में सवाल उठता है..
    जाति में “खत्री” ही क्यों, “अरोड़ा” क्यों नहीं?

ज़वाब – सरकार के जनगणना कॉलम में मान्यता प्राप्त जातियों में हमारे समाज से सम्बन्धित केवल एक ही जाति “खत्री” दर्ज़ है।

हम जानते हैं कि “अरोड़ा”, “क्षत्रिय (खत्री)” समुदाय की ही एक उपशाखा है लेकिन यह सरकारी जाति गणना सूची में स्वतंत्र पहचान के रूप में दर्ज नहीं है।

यदि हम अरोड़ा, चुग, गुलाटी, जुनेजा, खन्ना, कपूर, सूद, सेठी, आहूजा, नरूला, घई, चोपड़ा जैसे उपनाम या उपजातियाँ लिखते हैं तो हमारी संख्या विभाजित हो जाती है। नतीजतन संख्या की दृष्टि से हमारी जो सामूहिक सामाजिक शक्ति दिखनी चाहिए, वह नहीं दिखती।

इसका नुकसान :-
लोकतंत्र में जो जाति-समाज संख्या की दृष्टि से जितना सशक्त होता है, उसे उतना ही महत्त्व मिलता है। यदि हमेशा की तरह जनगणना में जाति के नाम पर बंट गये तो टुकड़ों-टुकड़ों में 15 करोड़ पंजाबियों की सामूहिक शक्ति फिर एक बार नहीं दिखेगी और कोई भी राजनीतिक दल हमें एक शक्तिशाली समाज के तौर पर रिकॉग्नाइज नहीं करेगा।

  1. दूसरा, भाषा “पंजाबी” क्यों लिखनी है?

ज़वाब :- “पंजाबी” हमारी भाषा है, संस्कृति है, परंपरा है, हमारी विश्वव्यापी पहचान है।

लेकिन जब हम अपनी भाषा “हिंदी” या कोई बोली जैसे “मुल्तानी”, “सिरायक़ी” या अन्य कोई क्षेत्रीय भाषा लिखवा देते हैं, तो राजनीतिक दलों और सरकारों को हम अनजाने में संदेश दे देते हैं कि “पंजाबी” कहे जाने वाले किसी समुदाय का कोई अस्तित्व ही नहीं है क्योंकि “भाषा” के आंकड़ों में “पंजाबी” दिखेगी ही नहीं अथवा बहुत कम दिखेगी।

इसका नुकसान
हमारे समाज की बहुत बड़ी संख्या होने के बावज़ूद हमें हमारी संख्या के अनुपात में राजनीतिक दलों से चुनावों में टिकट और सरकारी संस्थाओं में आनुपातिक प्रतिनिधित्व नहीं मिलता।

जातिगत अथवा भाषागत गणना में जो जाति और भाषा हम लिखते हैं, सरकारी आंकड़ों में वही सामूहिक रूप से हमारे समाज की वास्तविक संख्या मानी जाती है।

अतः यह जनगणना सिर्फ कागजी खानापूर्ति नहीं, हमारे भविष्य की नींव है और हर पंजाबी परिवार तक यह संदेश पहुँचाना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है

तो
हमारी जाति – खत्री जाति
हमारी भाषा – पंजाबी भाषा

क्योंकि
“जिसकी जितनी संख्या भारी,
उसकी उतनी भागीदारी”

“जैसी पहचान, वैसा सम्मान”

“जितना एकजुटत्व, उतना प्रतिनिधित्व”

“जाति खत्री-भाषा पंजाबी हो जाऊगी
तां पंजाबियां दी बल्ले बल्ले हो जाऊगी”

जय श्री राम

रमन कुमार सूद उपाध्यक्ष
ग्लोबल पंजाबी जागृति सोसायटी (पंजी.) उदयपुर