मनमोहन सिंह
मनमोहन सिंह भारत गणराज्य के 13वें प्रधानमंत्री, एक प्रख्यात अर्थशास्त्री, नौकरशाह और शिक्षाविद थे। वे साल 2004 से 2014 तक देश के प्रधानमंत्री रहे और भारत केप पहले सिख प्रधानमंत्री थे। उन्होंने 1991 में पी. वी.प नरसिम्हा राव की सरकार में वित्त मंत्री के रूप में देश में बड़े आर्थिक सुधार (LPG मॉडल) लागू किए, जिसके लिए उन्हें “आधुनिक भारत के
शिल्पकार” और आर्थिक सुधारों का जनक माना जाता है।
उनका जन्म 26 सितंबर 1932 को अविभाजित भारत के पंजाब प्रांत के गाह गाँव (अब पाकिस्तान में) में हुआ था।विभाजन का प्रभाव: 1947 में भारत-पाकिस्तान विभाजन के बाद उनका परिवार अमृतसर, भारत आकर बस गया।
उन्होंने पंजाब विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में स्नातक और स्नातकोत्तर की पढ़ाई पूरी की। उन्होंने कैंब्रिज विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में ऑनर्स और ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से डी.फिल की डिग्री हासिल की।
महत्वपूर्ण प्रशासनिक पदप्रधानमंत्री बनने से पहले उन्होंने भारत सरकार के कई शीर्ष पदों को संभाला।
1972 से 1976 के मध्य भारत सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार रहे। 1982 से 1985 के मध्य भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर रहे।
1985 से 1987 के बीच योजना आयोग के उपाध्यक्ष रहे। 1991 में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के अध्यक्ष बने। इसी साल में भारत गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहा था, तब तत्कालीन प्रधानमंत्री पी. वी. नरसिम्हा राव ने उन्हें देश का वित्त मंत्री बनाया और उन्होंने 1991 से 1996 के बीच देश की आर्थिक नीतियों में ऐतिहासिक सुधार किए जिन्हें शॉर्ट में LPG नीति कहा जाता है अर्थात् Liberalisation (उदारीकरण), Privatisation (निजीकरण) और Globalisation (वैश्वीकरण)। भारतीय अर्थव्यवस्था को वैश्विक बाजारों से जोड़ा गया। फिर संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (UPA) सरकार के नेतृत्व में लगातार दो बार (2004 और 2009) भारत के प्रधानमंत्री चुने गए। जवाहरलाल नेहरू के बाद वह पहले ऐसे प्रधानमंत्री थे, जिन्होंने अपना 5 साल का कार्यकाल पूरा करने के बाद दोबारा यह पद संभाला। डॉ. मनमोहन सिंह को भारतीय राजनीति में उनके बेहद शांत, सौम्य और ईमानदार व्यक्तित्व के लिए सम्मानपूर्वक याद किया जाता है।
कैंब्रिज विश्वविद्यालय द्वारा उन्हें एडम स्मिथ पुरस्कार 1956 में प्रदान किया गया था। भारत सरकार द्वारा 1987 में देश के दूसरे सबसे बड़े नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से नवाजा गया।अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय पत्रिका ‘यूरोमनी’ द्वारा 1993 में उन्हें ‘फाइनेंस मिनिस्टर ऑफ द ईयर’ चुना गया और उन्हें यूरो मनी अवार्ड प्रदान किया गया।
26 दिसंबर 2024 को 92 वर्ष की आयु में नई दिल्ली के एम्स अस्पताल में उनका निधन हो गया।
