सहगल परिवार
विवेक चंद का जन्म दिल्ली में 28 सितंबर 1956 को हुआ. वो एक जौहरी परिवार के थे, इसलिए पैसे की कभी कोई कमी नहीं थी. शिक्षा भी अच्छी जगहों से ली. उन्होंने पिलानी के बिरला पब्लिक स्कूल से स्कूल की शिक्षा पूरी की और दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक किया. बिजनेस में उनका पहला कदम चांदी के व्यापार से शुरू हुआ, जहां उन्होंने एक बार एक किलोग्राम चांदी सिर्फ एक रुपये में बेची थी.
साल 1975 में, विवेक चंद ने अपनी मां स्वर्ण लता सहगल के साथ मिलकर एक कंपनी की स्थापना की, जो शुरू में चांदी का व्यापार करती थी. इसी कारण उनकी कंपनी का नाम “मदरसन” (Mother-son) रखा गया। हालांकि, चांदी के बिजनेस में जल्द ही गिरावट आ गई और बिजनेस दिवालिया होने के कगार पर पहुंच गया. लेकिन विवेक इस परिस्थिति में भी परेशान नहीं हुए और ना विचलित हुए. उन्होंंने एक नए क्षेत्र में कदम रखने का फैसला किया और वो था कार के पार्ट्स बनाने का बिजनेस।
दो साल बाद, सहगल ने बिजली केबल का कारखाना स्थापित किया। 1983 में टोकाई इलेक्ट्रिक कंपनी (अब सुमितोमो वायरिंग सिस्टम्स) के साथ सहयोग के परिणामस्वरूप 1986 में मुख्य रूप से मारुति उद्योग के लिए वायरिंग हार्नेस निर्माता के रूप में मदरसन सुमी सिस्टम्स का निगमन हुआ। कंपनी 1993 में बीएसई और बाद में एनएसई पर सूचीबद्ध हुई ।
संवर्धन मदरसन ग्रुप ने जापान की प्रतिष्ठित कंपनी सुमितोमो इलेक्ट्रिक के साथ साझेदारी के बाद फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा। इस साझेदारी के मात्र बारह वर्षों में ग्रुप ने ग्यारह कंपनियों का अधिग्रहण किया। विवेक सहगल ने 1975 से 1995 तक ग्रुप के प्रबंध निदेशक के रूप में कार्य किया। तत्पश्चात् व्यवसाय के दैनिक कार्यों से पीछे हट गए और केवल समूह के अध्यक्ष के रूप में बने रहे। उनकी कंपनी भारत और दुनिया की सबसे बड़ी ऑटो पार्ट्स (कार के कल-पुर्जे, वायरिंग हार्नेस आदि) बनाने वाली कंपनियों में से एक है और उनका कारोबार दुनिया के 41 से अधिक देशों में फैला हुआ है। उनकी कंपनी BMW, मर्सिडीज-बेंज, वोक्सवैगन, फोर्ड और टोयोटा जैसी दुनिया की दिग्गज कार कंपनियों को पार्ट्स सप्लाई करती है।
संवर्धन मदरसन ग्रुप ऑटोमोटिव और अन्य उद्योगों के लिए कलपुर्जे बनाने वाली दुनिया की अग्रणी भारतीय बहुराष्ट्रीय कंपनियों में से एक है। यह कंपनी ऑटोमोबाइल निर्माताओं को वायरिंग हार्नेस, रियरव्यू मिरर, प्लास्टिक मॉड्यूल और लाइटिंग सिस्टम जैसे प्रमुख उत्पाद उपलब्ध कराती है।
2016 में सहगल को ईवाई एंटरप्रेन्योर ऑफ द ईयर अवार्ड , इंडिया से सम्मानित किया गया।
विवेक की पत्नी श्रीमती रेणु अलका सहगल का निधन हो चुका है। उनके दो बच्चे हैं, पुत्र, लक्ष वामन सहगल और पुत्री, विधि सहगल चोपड़ा। लक्ष वामन सहगल, समूह की प्रमुख कंपनियों संवर्धन मदरसन इंटरनेशनल और मदर्सन सुमी वायरिंग इंडिया में उपाध्यक्ष एवं निदेशक के रूप में व्यवसाय संभाल रहे हैं।
आज ऑस्ट्रेलिया के सबसे अमीर भारतीय विवेक सहगल ने साल 1970 के दशक में उन्होंने सिर्फ 2,500 रुपये से शुरुआत की थी और अब वो 1,05,600 करोड़ रुपये की सालाना बिक्री वाली कंपनी का नेतृत्व कर रहे हैं। अक्टूबर 2024 में, सहगल और उनके परिवार को फोर्ब्स की भारत के 100 सबसे धनी लोगों की सूची में 30वें स्थान पर रखा गया था , जिनकी कुल संपत्ति 8.9 बिलियन अमेरिकी डॉलर थी।
