मोहन मीकिन लिमिटेड (Mohan Meakin Limited) की कहानी भारत के आधुनिक शराब व खाद्य उद्योग के इतिहास की एक लंबी और गौरवशाली यात्रा है, जिसकी शुरुआत 1855 में एडवर्ड डायर द्वारा हिमाचल प्रदेश के कसौली में स्थापित एशिया की पहली ब्रुअरीज (शराब फैक्ट्री) के साथ हुई थी।

ब्रिटिश काल में जब भारत में बीयर बहुत महंगी और दुर्लभ थी, तब एडवर्ड डायर ने कसौली में आधुनिक बीयर बनाने की शुरुआत की। उनकी कंपनी का नाम ‘डायर ब्रुअरीज लिमिटेड’ (Dyer Breweries Ltd.) था। इसके बाद उन्होंने सोलन, शिमला, मुर्री और बर्मा में भी भट्टियाँ स्थापित कीं।
1887 में ब्रिटेन के एक अन्य प्रसिद्ध शराब बनाने वाले उद्यमी, एच.जी. मीकिन (H.G. Meakin) भारत आए। उन्होंने एडवर्ड डायर से शिमला और सोलन की ब्रुअरीज खरीद लीं और डलहौजी, रानीखेत व दार्जिलिंग में अपने कारखाने खोले। बाद में, प्रथम विश्व युद्ध के बाद डायर और मीकिन के व्यवसायों का विलय हो गया और ‘डायर मीकिन एंड कंपनी’ (Dyer Meakin & Co. Ltd.) का गठन हुआ।
1935 में बर्मा के भारत से अलग होने के बाद कंपनी का पुनर्गठन हुआ। 1949 में एक दूरदर्शी भारतीय उद्यमी, नरेंद्र नाथ मोहन ने कंपनी का प्रबंधन संभाला। उनके नेतृत्व में कंपनी ने तेजी से विकास किया और उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद स्थित मोहन नगर में 150 एकड़ का विशाल औद्योगिक परिसर स्थापित किया। इसके बाद, 1 नवम्बर 1966 को कंपनी का नाम बदलकर ‘मोहन मीकिन ब्रुअरीज लिमिटेड’ कर दिया गया।
19 दिसंबर 1954 को कंपनी ने अपना सबसे प्रतिष्ठित और ऐतिहासिक ब्रांड ओल्ड मोंक रम लॉन्च की जो एन एन मोहन के बेटे कर्नल वेद रतन मोहन का आविष्कार थी। यह वनीला फ्लेवर वाली डार्क रम देखते ही देखते भारतीयों की पसंदीदा बन गई और दुनिया में सबसे ज्यादा बिकने वाली रम में शामिल हो गई। इसमें दो आश्चर्य थे पहले यह वेद रतन मोहन बिल्कुल टी टोटलर थे और उन्होंने कभी शराब का सेवन नहीं किया और दूसरा यह कि ओल्ड मोंक रम को देश का सर्वाधिक लोकप्रिय ब्रांड बनाने के लिए उन्होंने इसके विज्ञापन पर ₹1 भी खर्च नहीं किया। सीएसडी कैंटीन एवं माउथ पब्लिसिटी के माध्यम से यह सर्वाधिक लोकप्रिय ब्रांड बना।
नरेंद्र नाथ मोहन के तीन बेटे थे जिनका नाम कर्नल वेद रतन मोहन, ब्रिगेडियर कपिल मोहन तथा सुखदेव मोहन था। 1969 में एन.एन. मोहन के निधन के बाद उनके बेटे कर्नल वेद रतन मोहन ने कार्यभार संभाला, लेकिन 1973 में उनकी असामयिक मृत्यु के बाद उनके भाई ब्रिगेडियर कपिल मोहन ने कंपनी की कमान संभाली। उनके नेतृत्व में कंपनी ने न केवल शराब निर्माण, बल्कि अन्य क्षेत्रों में भी तेजी से कदम रखा। 24 अप्रैल 1980 को कंपनी का नाम बदलकर ‘मोहन मीकिन लिमिटेड’ कर दिया गया जो इसकी वर्तमान पहचान है।

ब्रिगेडियर कपिल मोहन की अपनी कोई संतान नहीं थी, इसलिए 2018 में उनके निधन के बाद उनके भाई सुखदेव मोहन के बेटों ने कंपनी का संचालन अपने हाथों में लिया। हेमंत मोहन ने 2015 में मोहन मीकिन लिमिटेड के प्रबंध निदेशक का कार्यभार संभाला था और फिर 2018 में ब्रिगेडियर कपिल मोहन के निधन के उपरांत कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी बने। इन्होंने बदलते समय के साथ ओल्ड मोंक के गिरते बाजार को संभाला और ओल्ड मोंक गोल्ड रिजर्व, सुप्रीम और लिमिटेड कलेक्टर्स एडिशन जैसे प्रीमियम उत्पाद लॉन्च करके ब्रांड का आधुनिकीकरण किया। हेमंत मोहन के भाई विनय मोहन कंपनी में निदेशक के रूप में मार्केटिंग, प्रशासन और प्रशासनिक रणनीतियों का कार्यभार संभालते हैं। दोनों भाइयों ने मिलकर कंपनी को आज करीब ₹2,000 करोड़ से अधिक के टर्नओवर तक पहुँचाया है। शालिनी मोहन भी परिवार का हिस्सा हैं और कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में गैर-कार्यकारी निदेशक के रूप में अपनी सेवाएं दे रही हैं। कर्नल वेद रतन मोहन के बेटे रॉकी (राकेश) मोहन ने भी लंबे समय तक पारिवारिक व्यवसाय में योगदान दिया जो भारत के एक बेहद प्रसिद्ध शेफ, कुकबुक लेखक और फूड इन्फ्लुएंसर के रूप में भी जाने जाते हैं।
शराब के अलावा कंपनी ने रणनीतिक रूप से विविधीकरण किया और निम्नलिखित उत्पादों का निर्माण शुरू किया। खाद्य और पेय पदार्थ जैसे फ्रूट जूस, ब्रेकफास्ट फूड कॉर्नफ्लेक्स, दलिया, मिनरल वाटर और सिरका। साथ ही ब्रूअरीज़ की बोतलों की आवश्यकता को पूरा करने के लिए कांच के कारखाने स्थापित किए।
आज, कसौली और सोलन में स्थित उनकी ब्रुअरीज भारत की सबसे पुरानी चालू ब्रुअरीज में गिनी जाती हैं। मोहन मीकिन आज भी लायन बीयर (एशिया का पहला बीयर ब्रांड), गोल्डन ईगल व्हिस्की और बीयर व ओल्ड मोंक रम जैसे लीजेंड्री ब्रांड्स का उत्पादन करती है। कंपनी का वार्षिक राजस्व लगभग ₹1,900 करोड़ से ₹2,100 करोड़ के बीच आंका गया है।