कँवल रेखी सिलिकॉन वैली अमेरिका के एक बेहद प्रतिष्ठित और प्रसिद्ध भारतीय-अमेरिकी व्यवसायी, वेंचर कैपिटलिस्ट और परोपकारी व्यक्ति हैं। उन्हें वैश्विक स्तर पर भारतीय टेक उद्यमियों को स्थापित करने और मार्गदर्शन देने के लिए “सिलिकॉन वैली का गॉडफादर” भी माना जाता है।
कँवल रेखी का जन्म 29 अगस्त 1945 को अविभाजित भारत के रावलपिंडी में मेजर भगत सिंह रेखी और माता का राज कौर रेखी के घर हुआ था। भारत के विभाजन के समय उनका परिवार एक शरणार्थी के रूप में भारत आया और उत्तर प्रदेश के कानपुर में बस गया। उन्होंने आईआईटी बॉम्बे से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बी.टेक की डिग्री हासिल की। इसके बाद 1967 में वे अमेरिका गए तब उनकी जेब में सिर्फ $8 थे लेकिन मन में आसमान को छूते सपनों की पोटली और माता पिता के आशीर्वाद का खजाना था। इन्हीं सपनों को पूरा करने का संकल्प दिन रात दृढ़ करते हुए उन्होंने मिशिगन टेक यूनिवर्सिटी से एमएस की डिग्री प्राप्त की।
कन्वल रेखी पहले भारतीय-अमेरिकी संस्थापक और सीईओ थे जिन्होंने किसी वेंचर-समर्थित कंपनी को अमेरिकी शेयर बाजार ‘नैस्डैक’ पर लिस्ट करवाया था। उन्होंने 1982 में ‘एक्सेलन’ नामक एक नेटवर्क टेक्नोलॉजी कंपनी की स्थापना की थी जिसने इंटरनेट की रीढ़ माने जाने वाले इथरनेट और TCP/IP मानकों को व्यावसायिक रूप से सफल बनाया।
1987 में कंपनी के आईपीओ के बाद, 1989 में इसका विलय उस समय की दिग्गज सॉफ्टवेयर कंपनी ‘नोवेल’ के साथ हो गया, जहां वे कार्यकारी उपाध्यक्ष और मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी बने।
कन्वल रेखी ने 1992 में सिलिकॉन वैली के अन्य सफल भारतीय प्रवासियों के साथ मिलकर TiE (The Indus Entrepreneurs) नामक संगठन की स्थापना की।
यह आज दुनिया भर के भारतीय और दक्षिण एशियाई उद्यमियों को मार्गदर्शन और फंडिंग देने वाला दुनिया का सबसे बड़ा नेटवर्क बन चुका है। उन्होंने खुद हजारों नए स्टार्टअप्स को आगे बढ़ने में मदद की है।

साल 2007-2008 में उन्होंने ‘इन्वेन्टस कैपिटल पार्टनर्स’ की सह-स्थापना की, जो शुरुआती चरण के टेक स्टार्टअप्स में निवेश करती है।
1990 और 2000 के दशक में उन्होंने भारत सरकार को देश के वेंचर कैपिटल नियमों में सुधार करने और आईटी क्रांति को बढ़ावा देने के लिए नीतिगत सलाह दी।उन्होंने अपनी मातृभूमि और अपनी यूनिवर्सिटीज को बड़े पैमाने पर दान दिया। उन्होंने आईआईटी बॉम्बे में ‘कँवल रेखी स्कूल ऑफ इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी’ की स्थापना के लिए उन्होंने IIT बॉम्बे को 3 मिलियन डॉलर दान किए। इसके अलावा रेखी ने 2000 में मिशिगन टेक को 5 मिलियन डॉलर का योगदान दिया जहां उनके नाम पर कँवल एंड एन रेखी हॉल’ मौजूद है। कँवल रेखी को उनके इस योगदान के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई प्रतिष्ठित बिजनेस अवार्ड्स और डॉक्टरेट की मानद उपाधियों से सम्मानित किया जा चुका है।
2003 में रेखी को कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ इंटीग्रल स्टडीज द्वारा विशिष्ट सेवा के लिए बीना चौधरी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उन्हें 1987 में आर्थर यंग और वेंचर पत्रिका द्वारा “वर्ष का उद्यमी” पुरस्कार भी दिया गया था ।

उन्होंने 26 मार्च 1971 को अमेरिकी युवती ऐन से प्रेम विवाह किया था। ऐन रेखी ने कँवल के शुरुआती संघर्ष के दिनों और उनके व्यावसायिक करियर में हमेशा एक मजबूत स्तंभ की तरह उनका साथ दिया है। 1975 में अमेरिकी नागरिकता मिलने के बाद कँवल रेखी ने भारत से अपने भाई-बहनों और रिश्तेदारों को भी अमेरिका बुला लिया। आज उनका लगभग 40 लोगों का एक बड़ा संयुक्त परिवार कैलिफोर्निया के बे एरिया में साथ रहता है। कँवल और ऐन रेखी के दो बच्चे हैं, बेटी राज-ऐन रेखी गिल कैलिफोर्निया में एक प्रसिद्ध फंडरेज़िंग कंपनी की सलाहकार तथा पर्यावरण और रेडवुड जंगलों के संरक्षण के लिए काम करने वाली संस्था ‘Sempervirens Fund’ के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में भी शामिल हैं। उन्होंने साल 2014 में पवन गिल से शादी की थी। बेटा बेन रेखी, जो हॉलीवुड के एक जाने-माने फिल्म निर्देशक, निर्माता और पटकथा लेखक हैं।