कैप्टन विक्रम बत्रा भारतीय सेना के एक अत्यंत जांबाज अधिकारी थे, जिन्हें 1999 के कारगिल युद्ध में उनके अदम्य साहस और सर्वोच्च बलिदान के लिए मरणोपरांत भारत के सर्वोच्च सैन्य सम्मान परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया।

9 सितंबर 1974, पालमपुर, हिमाचल प्रदेश।
शिक्षा: पालमपुर के डीएवी पब्लिक स्कूल से स्कूली शिक्षा और चंडीगढ़ के डीएवी कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई पूरी की।

सेना मैं चैन से पूर्व उनका मर्चेंट नेवी में चयन हो गया था लेकिन उन्होंने 1994 में हांगकांग की मर्चेंट नेवी की नौकरी ठुकराकर सेना चुनी थी। 1996 में सीडीएस परीक्षा पास कर शीर्ष 35 उम्मीदवारों में जगह बनाई।
जून 1996 में भारतीय सैन्य अकादमी (IMA), देहरादून में प्रवेश लिया। आपको मानेकशॉ बटालियन में शामिल किया गया और 6 दिसंबर 1997 को स्नातक हुए।
पहली पोस्टिंग सोपोर, बारामूला (जम्मू-कश्मीर) में लेफ्टिनेंट के रूप में 13 जम्मू-कश्मीर राइफल्स में मिली।

मार्च 1998 में इन्फैंट्री स्कूल, महू में ‘यंग ऑफिसर कोर्स’ के विशेष प्रशिक्षण में अल्फा ग्रेडिंग और जनवरी 1999 में बेलगाम में कमांडो कोर्स में सर्वोच्च स्थान प्राप्त किया। उनकी पहली नियुक्ति 13 जम्मू और कश्मीर राइफल्स (13 JK Rifles) में हुई थी।

युद्ध के दौरान उन्हें कोड नाम ‘शेरशाह’ दिया गया था। पाकिस्तानी सेना के बीच भी उनका खौफ इतना था कि उन्हें ‘कारगिल का शेर’ कहा जाता था।

उनकी वीरता का सफर तब शुरू हुआ जब 1999 में उन्हें कारगिल युद्ध में पॉइंट 5140 और 4875 को मुक्त कराने की जिम्मेदारी मिली।

कैप्टन बत्रा ने 20 जून 1999 को बेहद दुर्गम क्षेत्र में स्थित पॉइंट 5140 पर दुस्साहसिक हमले का नेतृत्व किया और चोटी पर तिरंगा फहराया। ये कारनामा उन्होंने दुश्मन को जरा सी भी भनक दिये बिना किया। पॉइंट 5140 पर जीत हासिल करने के बाद उन्होंने रेडियो पर अपना विजय उद्घोष “यह दिल मांगे मोर” कहा था जो आज भी भारतीय सेना और युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

इसके बाद उन्होंने 17,000 फीट से ऊंची चोटी पॉइंट 4875 को फतह करने का कठिन मिशन संभाला। भीषण युद्ध के दौरान उन्होंने आमने-सामने की लड़ाई में 5 पाकिस्तानी सैनिकों को मार गिराया।  7 जुलाई 1999 की रात को अपने घायल साथी अधिकारी लेफ्टिनेंट नवीन को बचाते समय वे दुश्मन की गोलीबारी का शिकार हुए। प्राण त्यागने से पहले उन्होंने दुश्मन के ठिकानों को नष्ट कर दिया था। उनके आखिरी शब्द “जय माता दी” थे।

उनकी अद्भुत वीरता के लिए उन्हें भारत के सर्वोच्च युद्धकालीन वीरता पुरस्कार परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया, और जिस चोटी पर उन्होंने तिरंगा फहराया, उसे अब ‘बत्रा टॉप’ कहा जाता है।

कैप्टन विक्रम बत्रा के जीवन पर आधारित 2021 में ‘शेरशाह’ नाम की फिल्म भी बनी है, जिसमें अभिनेता सिद्धार्थ मल्होत्रा ने उनकी भूमिका निभाई है।