सेवा में,
श्रीयुत् नरेन्द्र जी मोदी,
माननीय प्रधानमंत्री,
भारत सरकार,
नई दिल्ली।

विषय: विभाजन विभीषिका से सर्वाधिक पीड़ित पंजाबी समुदाय के बलिदान, सम्मान और सशक्तिकरण और उनके ऐतिहासिक योगदान को मान्यता के संबंध में।

आदरणीय प्रधानमंत्री जी,
सर्वप्रथम हम देश के सम्पूर्ण पंजाबी समाज की ओर से आपके प्रति गहरी कृतज्ञता व्यक्त करते हैं कि आपने 2021 में लालकिले की प्राचीर से स्वाधीनता दिवस के पूर्व दिवस 14 अगस्त को “विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस” घोषित करके हमारे पूर्वजों के त्याग और बलिदान को मान्यता देकर अमर कर दिया। आपने उस पीड़ा को सम्मान में बदला, जो विभाजन का दंश झेलने वालों के मन में सदैव अंकित रही। आपके इस निर्णय ने राष्ट्र को सशक्त ही नहीं किया, बल्कि विभाजन की पीड़ा झेलने वाले करोड़ों पंजाबियों और उनकी पीढ़ियों को आत्मसम्मान का नया अध्याय दिया है।

दूसरा, एनसीईआरटी के द्वारा संस्तुत विद्यालय पाठ्यक्रम में विभाजन विभीषिका सम्बन्धी पाठ जोड़ने के लिए भी आपका हृदय से आभार व्यक्त करते हैं।

तीसरा, आपके द्वारा गुरु गोबिंद सिंह जी के साहिबज़ादों के बलिदान दिवस को “वीर बाल दिवस” घोषित करने से भी सम्पूर्ण पंजाबी समाज गौरवान्वित है और आपका आभारी है।

यह ऐतिहासिक तथ्य है कि 1947 की विभाजन विभीषिका के कारण पंजाबी समुदाय के करोड़ों लोगों को अपने पूर्वजों की धरती, खेत-खलिहान, घर-व्यवसाय छोड़ कर रातों-रात राजा से रंक हो जाने को विवश होना पड़ा। आकस्मात् आए आर्थिक, मानसिक व शारीरिक संकटों के अतिरिक्त समाज की महिलाओं को अपमान से बचने के लिए बलिदान होना पड़ा, इससे समस्त समुदाय का आत्मसम्मान भी छलनी हो गया। बावजूद इन समस्त समस्याओं के इस पुरुषार्थी समाज ने किसी के सामने हाथ नहीं फैलाए बल्कि अपने जीवट, परिश्रम और संघर्ष से शून्य से स्वयं के पुनर्निर्माण का एक स्वर्णिम इतिहास लिखा जो हमारी आगामी पीढ़ियों के मनोमस्तिष्क में अविस्मरणीय थाती के रूप में है और सदा रहेगा।

किंतु देश भर में फैले करोड़ों पंजाबियों के मन में यह व्यापक भाव है कि विभाजन त्रासदी में पंजाबी समुदाय के लाखों की संख्या में हुए बलिदानों, उनके संघर्ष और तत्पश्चात् देश के विकास व सुरक्षा के प्रति अभूतपूर्व योगदान को सरकार अथवा सामाजिक स्तर पर पर्याप्त रूप से न तो मान्यता और समर्थन मिला है और न ही अन्य समुदायों की तुलना में राजनीतिक सहभागिता मिली है। जबकि आकस्मिक एवं बलपूर्वक हुए विभाजन के परिणामस्वरूप अपना सब कुछ गंवा कर आए विस्थापितों को रोजगार और आवास जैसे क्षेत्रों में आरक्षण एवं प्राथमिकता दिये जाने की अत्याधिक आवश्यकता थी लेकिन तत्कालीन सरकार ने इस विषय में कोई पहल नहीं की और पश्चात्वर्ती सरकारों ने भी कभी हमारी सुध नहीं ली। इस सौतेले व्यवहार की पीड़ा और चुभन प्रत्येक पंजाबी के मन में रही है और आज भी है जिसे दूर करने के निमित्त हमारे निम्न निवेदन हैं:-

  1. विभाजन विभीषिका कल्याण बोर्ड की स्थापना – विश्व की सबसे बड़ी त्रासदी के पीड़ित पंचनद समुदाय के के लिए तत्काल एक वैधानिक राष्ट्रीय बोर्ड बनाया जावे जो विभाजन पीड़ित परिवारों के कल्याण, पुनर्वास और सम्मान से संबंधित योजनाओं का निर्माण, क्रियान्वयन और समन्वय करे।
  2. विभाजन विभीषिका पीड़ित परिवारों को आरक्षण – कश्मीर से हुआ हिंदुओं का विस्थापन हम सबके लिए अत्यंत पीड़ाजनक है लेकिन संख्या, अत्याचार एवं गंभीरता के दृष्टिकोण से देखा जाए तो देश विभाजन की विभीषिका कहीं अधिक व्यापक एवं बड़ी त्रासदी थी लेकिन जहां कश्मीर के पीड़ितों को शिक्षण संस्थानों और नौकरियों में आरक्षण दे दिया गया वहीं यह विडम्बना है कि विभाजन विभीषिका पीड़ित परिवारों को यह सुविधा दी जावे, कदाचित् इस पर कभी विचार ही नहीं हुआ। “देर आयद दुरूस्त आयद” के आधार पर हम मांग करते हैं कि विभाजन विभीषिका पीड़ित परिवारों को भी व्यावसायिक शिक्षण संस्थानों एवं नौकरियों में आरक्षण दिया जावे।
  3. विभाजन में बलिदान हुए नागरिकों हेतु राष्ट्रीय स्मारक –
    विभाजन विभीषिका में बलिदान हुए नागरिकों हेतु दिल्ली, अमृतसर, चंडीगढ़, अयोध्या जैसे स्थानों पर राष्ट्रीय स्मारक स्थापित करने का अनुरोध है।
  4. पंजाबी समुदाय के इतिहास और विभाजन अध्ययन के लिए प्रमुख विश्वविद्यालयों में चेयर की स्थापना- प्राचीनकाल से सीमाओं के प्रहरी के रूप में पंचनद प्रदेश वासियों के राष्ट्र की रक्षा हेतु दिए बलिदानों के स्वर्णिम इतिहास, विभाजन पूर्व एवं पश्चात् देश के विकास में दिए महत्वपूर्ण योगदान, विभाजन की परिस्थितियों के आकलन, विभाजन उपरांत विस्थापितों की त्रासदी और पुनर्स्थापित होने के संघर्ष पर वैज्ञानिक शोध और अनुसंधान हो।
  5. विद्यालय पाठ्यक्रम में विभाजन अध्ययन पाठ जोड़ना –
    NCERT द्वारा जोड़ा गया विभाजन विभीषिका संबंधी अध्याय पूरे देश के सीबीएसई से संबद्ध विद्यालयों में क्रियान्वन के साथ राज्य सरकारों को भी उसे लागू करने के लिए निर्देशित किया जाए।
  6. पंजाबी समुदाय के सम्मान और मान्यता हेतु नगरों का नव-नामकरण – स्थापित मान्यताओं के अनुसार भगवान राम के वंशज एवं पंजाबी समुदाय के पूर्वज अरुट जी महाराज के एवं समुदाय के अन्य महापुरुषों/ बलिदानियों के प्रति समाज की आस्था को मान्यता देते हुए प्रमुख नगरों जैसे फरीदाबाद का नाम अरुट जी महाराज नगर, मलेरकोटला का नाम वीर हकीकतराय नगर, फिरोजपुर का नाम भगतसिंह नगर रखा जावे। उक्त केवल उदाहरण स्वरूप हैं। इनके अतिरिक्त विश्वविद्यालयों, आयुर्विज्ञान-अभियांत्रिकी-विधि इत्यादि महाविद्यालयों, सैन्य, प्रशिक्षण संस्थाओं एवं अन्यान्य संस्थाओं का नामकरण भी तर्कसंगत आनुपातिक आधार पर हमारे समुदाय के महापुरुषों के नाम पर किया जाना चाहिए।
  7. श्री अरुट जी महाराज जयंती को “पंजाबी गौरव दिवस”-
    30 मई को श्री अरुट जी महाराज की जयंती को “पंजाबी गौरव दिवस” के रूप में मनाने की घोषणा की जाए और पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान इत्यादि राज्यों में जहां पंजाबी समुदाय बहुतायत में है, में सार्वजनिक अवकाश की घोषणा की जावे।
  8. पंजाबी कल्याण बोर्डों की स्थापना –
    पंजाबी समुदाय की भाषा, संस्कृति और विरासत के संरक्षण, संवर्द्धन और प्रचार प्रसार हेतु महत्वपूर्ण पंजाबी जनसंख्या वाले राज्यों में पंजाबी कल्याण बोर्ड स्थापित किए जाएं।
  9. पंजाबी को अधिकृत भाषा की मान्यता-
    भारत के जिन राज्यों में पंजाबी को विद्यालयीन शिक्षा में अधिकृत भाषा के रूप में मान्यता नहीं है, वहां मान्यता दी जावे।
  10. आगामी जनगणना में “पंजाबी खत्री” कॉलम हो –
    आगामी जनसंख्या गणना में हमारे समाज को केवल “खत्री” के रूप में वर्गीकृत न करके “पंजाबी खत्री” के रूप में सही पहचान दी जाए ताकि हमारे समाज के करोड़ों सदस्यों की वास्तविक संख्या और पहचान राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित हो सके।
  11. शरणार्थी नहीं बल्कि “विभाजन-विस्थापित” :
  • हमें, एक समुदाय के रूप में, ‘शरणार्थी’ शब्द से आपत्ति है क्योंकि हम अपना देश छोड़ कर दूसरे देश में शरण मांगने नहीं पहुंचे थे बल्कि एक अभूतपूर्व एवं आकस्मिक राजनीतिक निर्णय के कारण अपने ही देश में अपने धर्म, सम्मान की रक्षा हेतु विस्थापित हुए थे। हमारी भारत सरकार से यह पुरजोर मांग है कि हमारे समुदाय/व्यक्ति को आधिकारिक रिकॉर्ड में ‘विभाजन-विस्थापित’ अथवा ‘विभाजन विभीषिका पीड़ित समुदाय अथवा व्यक्ति’ के रूप में संदर्भित किया जाए।

अनुरोध
हम आपसे उक्त उपायों के लिए आधिकारिक मान्यता और समर्थन प्रदान करने का अनुरोध करते हैं जो देश के करोड़ों पंजाबियों, जिन्होंने आधुनिक भारत के निर्माण में अपना योगदान दिया, की गरिमा, सम्मान और स्मृति को संजोए रखने में सहायक होने के साथ साथ समुदाय के लिए कल्याणकारी भी होगा।

हमें विश्वास है कि आपकी “सबका साथ-सबका विकास-सबका सम्मान” नीति के आधार पर विभाजन विभीषिका से सर्वाधिक पीड़ित हमारे समाज को भी न्याय, सम्मान और समान अवसर प्राप्त होगा।

शीघ्र एवं सकारात्मक कार्यवाही की आशा में…

सादर

आपके ही शब्दों में “विभाजन विभीषिका पीड़ित” समाज के प्रतिनिधि

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