भाई बचित्तर सिंह (6 मई 1664 – दिसंबर 1705) सिख इतिहास के एक महान योद्धा और दसम गुरु, श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के सेनापति थे। उन्हें उनकी अदम्य वीरता और लोहगढ़ के किले की रक्षा के लिए जाना जाता है।
भाई बचित्तर सिंह की सबसे प्रसिद्ध गाथा 1 सितंबर 1700 की है, जब आनंदपुर साहिब की घेराबंदी के दौरान पहाड़ी राजाओं ने लोहगढ़ के किले का दरवाजा तोड़ने के लिए एक शराब पिए हुए मस्त हाथी को भेजा था।
गुरु गोबिंद सिंह जी के आदेश पर, भाई बचित्तर सिंह ने अकेले ही उस हाथी का सामना किया। उन्होंने अपने नागनी भाले (एक विशेष सर्पिलाकार भाला) से हाथी के माथे पर इतनी ज़ोर से वार किया कि वह पीछे मुड़ गया और अपनी ही सेना को कुचलने लगा।
वे भाई मणि सिंह के पुत्र थे और एक परमार राजपूत परिवार से संबंध रखते थे। उनके परिवार के कई सदस्यों ने सिख पंथ के लिए अपनी शहादत दी।
शहादत: उन्होंने आनंदपुर साहिब की कई लड़ाइयों में हिस्सा लिया। चमकौर की जंग के बाद, सरसा नदी पार करते समय वे गंभीर रूप से घायल हो गए और दिसंबर 1705 में कोटला निहंग खान में उनकी मृत्यु हुई।
