अंग्रेजों के विरुद्ध भारतीय स्वतंत्रता संग्राम:
पंजाब ने भारत की आजादी के लिए हजारों प्राणों की आहुति दी, जिसमें एंग्लो-सिख युद्धों (1845-1849) से लेकर जलियांवाला बाग हत्याकांड (1919) तक अनगिनत सिख सैनिकों और क्रांतिकारियों ने शहादत दी। 1857 के विद्रोह के समय भी पंजाब के वीरों ने अंग्रेजों के विरुद्ध लड़कर अपना सर्वस्व न्योछावर किया था।

विभिन्न संघर्षों में पंजाबियों का योगदान:
एंग्लो-सिख युद्ध (1845-1849): मुदकी, फिरोजशाह और चेलियांवाला जैसे युद्धों में हज़ारों सिख सैनिकों ने बहादुरी से लड़ते हुए अपने प्राण दिए, जिनका उल्लेख ब्रिटिश अधिकारियों ने भी किया है।

ग़दर आंदोलन (1913-1917) भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का पहला संगठित अंतरराष्ट्रीय क्रांतिकारी प्रयास था। इसकी नींव अमेरिका और कनाडा में बसे भारतीय प्रवासियों, जिनमें 95% से अधिक पंजाबी किसान और पूर्व सैनिक थे, द्वारा रखी गई थी।

जलियांवाला बाग (1919): अमृतसर में जनरल डायर द्वारा निहत्थे हज़ारों पंजाबियों की हत्या कर दी गई, जो भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की सबसे बड़ी त्रासदियों में से एक है।

 क्रांतिकारी आंदोलन: भगत सिंह, सुखदेव, लाला लाजपत राय, और करतार सिंह सराभा जैसे क्रांतिकारियों ने पंजाब से ही निकलकर स्वतंत्रता संग्राम में अपना सर्वोच्च बलिदान दिया।