राजा पोरस (पुरु) चौथी शताब्दी ईसा पूर्व के एक पराक्रमी पौरव राजा थे जिनका शासनकाल 340-315 ईसा पूर्व के आसपास था। आपका राज्य पंजाब में झेलम और चेनाब नदियों के बीच स्थित था। उनकी राजधानी संभवतः वर्तमान पाकिस्तान के मंडी बहाउद्दीन या लाहौर के पास थी। वे नंद साम्राज्य के विरुद्ध चंद्रगुप्त मौर्य के समकालीन और मित्र माने जाते हैं।
वह एक स्वाभिमानी शासक थे जिन्होंने उनके मामा तक्षशिला के राजा आम्भी के समान सिकंदर के सामने झुकने के बजाय संघर्ष का रास्ता चुना। 326 ईसा पूर्व में, उन्होंने झेलम के तट पर सिकंदर महान के साथ प्रसिद्ध झेलम (ग्रीक भाषा में हाइडस्पेस) का युद्ध लड़ा।
कुछ इतिहासकारों का कहना है कि बहादुरी से लड़ने के बावजूद युद्ध में पोरस की हार हुई। वे लिखते हैं कि हार के बाद जब सिकंदर ने पोरस से पूछा कि उनके साथ कैसा व्यवहार किया जाए तो पोरस ने उत्तर दिया- “जैसा एक राजा दूसरे राजा के साथ करता है।” इस वीरतापूर्ण उत्तर से प्रभावित होकर सिकंदर ने न केवल उनका राज्य लौटाया बल्कि उन्हें मित्र राष्ट्र का दर्जा दिया।
इसके विपरीत अनेक इतिहासकार बताते हैं कि इस युद्ध में सिकंदर की हार हुई थी। यही कारण था कि सिकंदर को वापस लौटना पड़ा वरना विश्व विजय की लालसा से निकला सिकंदर वापस नहीं लौटता। यह इससे भी सिद्ध होता है कि युद्ध में लगे घावों के कारण मार्ग में ही उसकी मृत्यु हो गई। इतिहासकार दियोदोरस लिखता है कि पुरु की सेना के हाथियों में अपार बल था और वे अत्यंत लाभकारी सिद्ध हुए। अपने पैरों तले उन्होंने बहुत सारे यूनानी सैनिकों को चूर-चूर कर दिया। प्लुटार्क लिखते हैं कि इस युद्ध में यूनानी आठ घंटे तक लड़ते रहे पर किस्मत ने इस बार उनका साथ नहीं दिया।’
इथोपियाई महाकाव्यों का संपादन करने वाले ईएडब्ल्यू बैज लिखते हैं कि झेलम के युद्ध में सिकंदर की अश्व सेना का अधिकांश भाग समाप्त हो गया। सिकंदर ने अनुभव किया कि यदि मैं लड़ाई को आगे जारी रखूंगा तो पूर्ण रूप से अपना नाश कर लूंगा। अतः उसने आत्मसमर्पण कर युद्ध बंद करने की पुरु से प्रार्थना की। भारतीय परंपरा के अनुसार पुरु ने शत्रु का वध नहीं किया। इसके पश्चात संधि पर हस्ताक्षर हुए।
पोरस ने सिकंदर की वापसी के बाद पंजाब-सिंध क्षेत्र में अपने राज्य का विस्तार किया जो 315 ईसा पूर्व के आसपास चंद्रगुप्त मौर्य के नेतृत्व में मौर्य साम्राज्य की स्थापना के साथ समाप्त हुआ।
पोरस का राज्य बहुत विशाल और समृद्ध था। झेलम और चेनाब के बीच स्थित भूमि बेहद उपजाऊ थी। उत्तम कृषि के अतिरिक्त उद्योग एवं व्यवसाय से भी राज्य पूर्णत: संपन्न और समृद्ध था। इतिहासकार स्ट्रैबो के अनुसार, इस क्षेत्र में उस समय लगभग 300 शहर स्थित थे। स्थानीय किंवदंतियों में उन्हें अपनी मातृभूमि और प्रजा के प्रति समर्पित, वीर एवं लोकप्रिय शासक के रूप में याद किया जाता है
