सुखदेव थापर भारत के एक प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी और क्रांतिकारी थे, जिन्होंने भगत सिंह और राजगुरु के साथ मिलकर देश की आजादी के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए। पंजाब के लुधियाना में जन्मे सुखदेव, हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन (HSRA) के एक प्रमुख रणनीतिकार थे और लाला लाजपत राय की मौत का बदला लेने वाली जे.पी. सॉन्डर्स की हत्या (1928) में उनकी मुख्य भूमिका थी।

सुखदेव का जन्म 15 मई, 1907 को पंजाब के लुधियाना के नौघरा मोहल्ले में पिता रामलाल थापर और माता रल्ली देवी के यहां हुआ था। बचपन में ही पिता के निधन के बाद, उनका पालन-पोषण उनके चाचा अचिंतराम ने किया।

सुखदेव एचएसआरए (HSRA) के पंजाब और उत्तरी भारत के प्रमुख थे। लाला लाजपत राय की लाठीचार्ज से हुई मौत का बदला लेने के लिए उन्होंने भगत सिंह और राजगुरु के साथ मिलकर सॉन्डर्स को मार गिराया था।उन्होंने देश के युवाओं को आजादी की लड़ाई से जोड़ने के लिए ‘नौजवान भारत सभा’ की स्थापना में भगत सिंह के साथ अहम भूमिका निभाई। उन्होंने जेल में कैदियों के साथ अमानवीय व्यवहार के विरुद्ध 1929 में लंबी भूख हड़ताल की थी।

लाहौर षड्यंत्र केस के अंतर्गत ब्रिटिश सरकार ने सुखदेव, भगत सिंह और राजगुरु को मौत की सजा सुनाई। तीनों को 23 मार्च 1931 की शाम को लाहौर सेंट्रल जेल में फांसी दी गई।

सुखदेव एक निडर नेता थे जिन्हें भारत में हमेशा उनके अदम्य साहस और बलिदान के लिए याद किया जाता है।