डॉ. नरेंद्र सिंह कपानी
डॉ. नरेंद्र सिंह कपानी भारत में जन्मे एक महान और विश्व प्रसिद्ध भौतिक विज्ञानी थे। उन्हें विज्ञान की दुनिया में “फादर ऑफ फाइबर ऑप्टिक्स” के रूप में जाना जाता है। Fortune पत्रिका ने उन्हें 1999 के विशेष अंक में “बिजनेसमैन ऑफ द सेंचुरी” के तहत...
डॉ. हरगोविंद खुराना
डॉ. हरगोविंद खुराना भारतीय मूल के एक महान अमेरिकी जैव रसायनज्ञ (Biochemist) थे. उन्होंने आनुवंशिक कोड (Genetic Code) की व्याख्या की और प्रोटीन संश्लेषण में इसकी भूमिका को उजागर किया. इस युगांतकारी खोज के लिए उन्हें 1968 में चिकित्सा का नोबेल पुरस्कार प्रदान किया गया....
टी-सीरीज समूह
भूषण कुमार भारत की सबसे बड़ी म्यूजिक लेबल और फिल्म निर्माण कंपनी टी-सीरीज (Super Cassettes Industries Limited) के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक हैं। वे भारतीय फिल्म उद्योग के एक बेहद सफल और धनी फिल्म निर्माता व संगीत निर्माता के रूप में जाने जाते हैं। वे टी-सीरीज के...
गौरव मल्होत्रा, दीप मल्होत्रा, गौतम मल्होत्रा
ओएसिस समूह
शिरोमणि अकाली दल के फरीदकोट से विधायक रहे दीप मल्होत्रा के स्वामित्व में ओएसिस ग्रुप मुख्य रूप से शराब उत्पादन, एथेनॉल और रियल एस्टेट (Oasis Spaces) क्षेत्रों में सक्रिय है। समूह की प्रमुख डिस्टिलरी और बॉटलिंग यूनिट पंजाब के बठिंडा जिले में संगत कलां में स्थित है। इसके अलावा, यह ग्रुप प्रमुख ब्रैंड्स जैसे ऑल सीजन्स (All Seasons) और स्टार वॉल्कर (Star Walker) के लिए जाना जाता है।
ओएसिस ग्रुप ने पंजाब के डेराबस्सी क्षेत्र (Oasis Spaces, Nimbuan) में कंस्ट्रक्शन और आर्किटेक्चरल प्रोडक्ट्स के लिए भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है।
दीप मल्होत्रा बताते हैं कि उनके पिता ओमप्रकाश मल्होत्रा ने 1987 में एक छोटी सी शराब की भट्टी स्थापित की थी जिसे उन्होंने पिछले तीन दशकों में 1,500 करोड़ रुपये के कारोबार में बदल दिया है जिसका 18 राज्यों में शराब के निर्माण, वितरण और विपणन में दखल है।
ओएसिस ने हरियाणा में भी अपनी पैठ बना ली है। कंपनी ने चड्ढा समूह से अंबाला में दो डिस्टिलरी खरीदी हैं। ये इकाइयां हरदीप सिंह चड्ढा के परिवार से खरीदी गई थीं जिनकी उनके भाई पोंटी चड्ढा के फार्महाउस पर 2012 में हुई गोलीबारी में मृत्यु हो गई थी।
समूह ने दिल्ली और मसूरी में संपत्तियों के साथ आतिथ्य क्षेत्र में भी कदम रखा है। उन्हें उम्मीद है कि 2015-16 में व्यवसाय में 33 प्रतिशत की वृद्धि होगी और यह 2,000 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर जाएगा।
