सोना समूह

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सोना समूह संजय जे कपूर एक दूरदर्शी भारतीय-अमेरिकी उद्योगपति थे, जिन्होंने ऑटोमोटिव कंपोनेंट निर्माता कंपनी सोना कॉमस्टार के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया। उनके नेतृत्व में कंपनी पारंपरिक पुर्जों से आगे बढ़कर इलेक्ट्रिक वाहन (EV) तकनीक में एक वैश्विक अग्रणी बनी। संजय...
इंडिया टुडे समूह

इंडिया टुडे समूह

इंडिया टुडे समूहइंडिया टुडे की स्थापना 1975 में विद्या विलास पुरी (थॉम्पसन प्रेस के मालिक) द्वारा की गई थी, जिसमें उनकी बेटी मधु त्रेहन संपादक और उनके बेटे अरुण पुरी प्रकाशक थे। मधु त्रेहन बाद में संयुक्त राज्य अमेरिका लौट गईं जिसके बाद संपादकीय नेतृत्व अन्य संपादकों...
डाबर समूह

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डाबर (Dabur) के प्रमोटर बर्मन परिवार की जड़ें मूल रूप से पंजाब से ही जुड़ी हुई हैं। हालाँकि, उनका परिवार काफी पहले कलकत्ता में बस गया था। वे पंजाबी खत्री समुदाय से संबंध रखते हैं।इस 140 साल पुराने व्यवसायिक घराने की नींव 1884 में डॉ. एस.के. बर्मन द्वारा कोलकाता में...
कैपारो ग्रुप

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कैपारो ग्रुपपद्माश्री लॉर्ड स्वराज पॉल द्वारा स्थापित समूहलॉर्ड स्वराज पॉल (बैरन पॉल) भारतीय मूल के एक अत्यंत प्रसिद्ध ब्रिटिश उद्योगपति, राजनीतिज्ञ और परोपकारी व्यक्ति थे जिन्होंने ब्रिटेन में ‘कैपारो ग्रुप’ की स्थापना की। उनका जन्म 18 फरवरी 1931 को पंजाब...
थापर समूह                                                                थापर समूह भारत के सबसे पुराने और प्रमुख औद्योगिक घरानों में से एक है। 1920 में करम चंद थापर द्वारा शुरू किए गए इस समूह ने कोयला खनन से शुरुआत की थी। कोयले के राष्ट्रीयकरण से पहले थापर समूह भारत का दूसरा सबसे बड़ा कोयला उत्पादक था। इसके अतिरिक्त चीनी, कागज, रसायन, वस्त्र, बैंकिंग, बीमा और इंजीनियरिंग उत्पादों और सेवाओं में भी कारोबार करता था। थापर समूह ने भारत के कुछ सबसे प्रतिष्ठित संस्थानों की स्थापना की है, जैसे ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स, ओरिएंटल इंश्योरेंस आदि। यह समूह कभी देश के शीर्ष 10 व्यापारिक घरानों में शामिल था लेकिन आज यह कई अलग-अलग स्वतंत्र व्यापारिक समूहों में विभाजित हो चुका है। पारिवारिक विभाजन से पहले 2000 में इसमें 100 से अधिक कंपनियाँ थीं। निम्नलिखित कंपनियाँ समूह का हिस्सा हैं या रह चुकी हैं: ग्रीव्स कॉटन , द पायनियर , सोहना स्टड फार्म प्राइवेट लिमिटेड, टीटी एंड जी ट्रेडिंग प्राइवेट लिमिटेड, बिल्ट मिडिल ईस्ट प्राइवेट लिमिटेड, हिमालयन हाइडअवेज़ प्राइवेट लिमिटेड, करम चंद थापर एंड ब्रदर्स लिमिटेड, लवासा कॉर्पोरेशन लिमिटेड और केसीटी पेपर्स लिमिटेड।करमचंद ठाकुर के चार पुत्र थे। इंद्र मोहन बृजमोहन ललित मोहन, और एम मोहन। इंद्र मोहन के एक पुत्र हुए विक्रम थापर जिनके एक पुत्र वरुण थापर और एक पुत्री आयशा थापर हैं। बृज मोहन के दो पुत्र हुए गौतम और करण। तीसरे ललित मोहन अविवाहित रहे और उन्होंने गौतम थापर को अपना वारिस बनाया। चौथे एम मोहन को एक पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई, समीर थापर।कालांतर  में थापर परिवार के विभाजन पश्चात् अगली पीढ़ियों ने अपनी कंपनियों के अनेक समूह बनाए। प्रमुख विभाजन में निम्नलिखित शामिल हैं:मनमोहन थापर और उनके परिवार को जेसीटी लिमिटेड, जेसीटी मिल्स और जेसीटी इलेक्ट्रॉनिक्स प्राप्त हुए। जेसीटी लिमिटेड कपड़ा और फिलामेंट यार्न के क्षेत्र में कार्यरत है।क्रॉम्पटन ग्रीव्स और भारत स्टार्च बृजमोहन थापर को दिए गए थे, जो बाद में उनके बेटे गौतम को सौंप दिए गए। इनके अलावा, ग्रीव्स कॉटन, प्रीमियम ट्रांसमिशन लिमिटेड और इंग्लिश इंडियन क्लेज़ लिमिटेड करण के स्वामित्व में थे। ललित मोहन थापर को बिल्ट कंपनी मिली और चूंकि वे जीवन भर अविवाहित रहे, इसलिए उन्होंने गौतम को अपना उत्तराधिकारी नामित किया।इंदर मोहन के बेटे विक्रम और पोते-पोतियों वरुण और आयशा को केसीटी कोल सेल्स, आईसीपीएल, वाटर बेस लिमिटेड और टाइगर बे रेस्तरां श्रृंखला विरासत में मिली। केसीटी ग्रुप (KCT Group): करम चंद थापर एंड ब्रदर्स (KCT) अब भी खनन, रियल एस्टेट और लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में सक्रिय है।पटियाला स्थित प्रसिद्ध थापर इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, जिसे पहले थापर यूनिवर्सिटी के नाम से जाना जाता था, इसी परिवार की देन है। यह थापर परिवार द्वारा वित्त पोषित एक सामूहिक परियोजना है जिसके वर्तमान अध्यक्ष गौतम थापर हैं।अवंथा ग्रुपललित मोहन थापर के 2007 में निधन के बाद उनके भाई बृज मोहन थापर के बेटे और करम चंद थापर के पोते गौतम थापर द्वारा 2007 में अवंथा ग्रुप स्थापित किया गया। इसमें क्रॉम्पटन ग्रीव्स और बल्लारपुर इंडस्ट्रीज (BILT) जैसी दिग्गज कंपनियाँ शामिल थीं। गौतम के नेतृत्व में क्रॉम्पटन ग्रीव्स ने बेल्जियम में पॉवेल्स, हंगरी में गांज़, आयरलैंड में माइक्रोसोल, फ्रांस में सोनोमात्रा, अमेरिका में एमएसई पावर सिस्टम्स, ब्रिटेन में विद्युत प्रौद्योगिकी समाधान, नेल्को इंडिया में तीन व्यवसाय, स्वीडन में इमोट्रॉन, अमेरिका में क्यूईआई इंक, स्पेन में ज़िव ग्रुप, मलेशिया में सबाह वन उद्योग का अधिग्रहण कर उन्होंने वर्ष 2000 से 2013 तक समूह को मात्र 200 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 20,000 करोड़ रुपये तक पहुँचा दिया है।गौतम के भाई करण ने होल्डिंग कंपनी करुण कार्पेट्स प्राइवेट लिमिटेड का कार्यभार संभाला, जिसने डीबीएच इंटरनेशनल (काओलिन इंडिया सहित), भारत स्टार्च प्रोडक्ट्स, डीबीएच इन्वेस्टमेंट्स का अधिग्रहण किया और जिसने ग्रीव्स कॉटन , प्रीमियम ट्रांसमिशन, डीबीएच होल्डिंग, ग्रीव्स लीजिंग, डी ग्रीव्स, डीबीएच कंसल्टिंग और एम्पीयर व्हीकल्स का अधिकांश हिस्सा प्राप्त किया।इंदर मोहन थापर के बेटे विक्रम थापर और पोते वरुण थापर केसीटी समूह की देखरेख करते हैं, जिसमें कलकत्ता स्थित कोयला व्यापार कंपनी केसीटी कोल सेल्स (केसीटी ब्रदर्स) भी शामिल है। विक्रम एम. थापर ने 90 के दशक में वाटरबेस लिमिटेड की शुरुआत की थी, जिसका मुख्य व्यवसाय निर्यात के लिए झींगा पालन सहित मत्स्य पालन था। जेसीटी मिल्स का एक नामी गिरामी फुटबॉल क्लब JCTFC नाम से था, जिसे 2011 में भंग कर दिया गया था। क्लब ने भारत की शीर्ष स्तरीय लीगों, नेशनल फुटबॉल लीग (भारत) और पंजाब स्टेट सुपर फुटबॉल लीग में प्रतिस्पर्धा की है।

थापर समूह                                                                थापर समूह भारत के सबसे पुराने और प्रमुख औद्योगिक घरानों में से एक है। 1920 में करम चंद थापर द्वारा शुरू किए गए इस समूह ने कोयला खनन से शुरुआत की थी। कोयले के राष्ट्रीयकरण से पहले थापर समूह भारत का दूसरा सबसे बड़ा कोयला उत्पादक था। इसके अतिरिक्त चीनी, कागज, रसायन, वस्त्र, बैंकिंग, बीमा और इंजीनियरिंग उत्पादों और सेवाओं में भी कारोबार करता था। थापर समूह ने भारत के कुछ सबसे प्रतिष्ठित संस्थानों की स्थापना की है, जैसे ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स, ओरिएंटल इंश्योरेंस आदि।

यह समूह कभी देश के शीर्ष 10 व्यापारिक घरानों में शामिल था लेकिन आज यह कई अलग-अलग स्वतंत्र व्यापारिक समूहों में विभाजित हो चुका है। पारिवारिक विभाजन से पहले 2000 में इसमें 100 से अधिक कंपनियाँ थीं। निम्नलिखित कंपनियाँ समूह का हिस्सा हैं या रह चुकी हैं: ग्रीव्स कॉटन , द पायनियर , सोहना स्टड फार्म प्राइवेट लिमिटेड, टीटी एंड जी ट्रेडिंग प्राइवेट लिमिटेड, बिल्ट मिडिल ईस्ट प्राइवेट लिमिटेड, हिमालयन हाइडअवेज़ प्राइवेट लिमिटेड, करम चंद थापर एंड ब्रदर्स लिमिटेड, लवासा कॉर्पोरेशन लिमिटेड और केसीटी पेपर्स लिमिटेड।
करमचंद ठाकुर के चार पुत्र थे। इंद्र मोहन बृजमोहन ललित मोहन, और एम मोहन। इंद्र मोहन के एक पुत्र हुए विक्रम थापर जिनके एक पुत्र वरुण थापर और एक पुत्री आयशा थापर हैं। बृज मोहन के दो पुत्र हुए गौतम और करण। तीसरे ललित मोहन अविवाहित रहे और उन्होंने गौतम थापर को अपना वारिस बनाया। चौथे एम मोहन को एक पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई, समीर थापर।

कालांतर  में थापर परिवार के विभाजन पश्चात् अगली पीढ़ियों ने अपनी कंपनियों के अनेक समूह बनाए। प्रमुख विभाजन में निम्नलिखित शामिल हैं:

मनमोहन थापर और उनके परिवार को जेसीटी लिमिटेड, जेसीटी मिल्स और जेसीटी इलेक्ट्रॉनिक्स प्राप्त हुए। जेसीटी लिमिटेड कपड़ा और फिलामेंट यार्न के क्षेत्र में कार्यरत है।

क्रॉम्पटन ग्रीव्स और भारत स्टार्च बृजमोहन थापर को दिए गए थे, जो बाद में उनके बेटे गौतम को सौंप दिए गए। इनके अलावा, ग्रीव्स कॉटन, प्रीमियम ट्रांसमिशन लिमिटेड और इंग्लिश इंडियन क्लेज़ लिमिटेड करण के स्वामित्व में थे।
ललित मोहन थापर को बिल्ट कंपनी मिली और चूंकि वे जीवन भर अविवाहित रहे, इसलिए उन्होंने गौतम को अपना उत्तराधिकारी नामित किया।

इंदर मोहन के बेटे विक्रम और पोते-पोतियों वरुण और आयशा को केसीटी कोल सेल्स, आईसीपीएल, वाटर बेस लिमिटेड और टाइगर बे रेस्तरां श्रृंखला विरासत में मिली। केसीटी ग्रुप (KCT Group): करम चंद थापर एंड ब्रदर्स (KCT) अब भी खनन, रियल एस्टेट और लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में सक्रिय है।

पटियाला स्थित प्रसिद्ध थापर इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, जिसे पहले थापर यूनिवर्सिटी के नाम से जाना जाता था, इसी परिवार की देन है। यह थापर परिवार द्वारा वित्त पोषित एक सामूहिक परियोजना है जिसके वर्तमान अध्यक्ष गौतम थापर हैं।

अवंथा ग्रुप
ललित मोहन थापर के 2007 में निधन के बाद उनके भाई बृज मोहन थापर के बेटे और करम चंद थापर के पोते गौतम थापर द्वारा 2007 में अवंथा ग्रुप स्थापित किया गया। इसमें क्रॉम्पटन ग्रीव्स और बल्लारपुर इंडस्ट्रीज (BILT) जैसी दिग्गज कंपनियाँ शामिल थीं। गौतम के नेतृत्व में क्रॉम्पटन ग्रीव्स ने बेल्जियम में पॉवेल्स, हंगरी में गांज़, आयरलैंड में माइक्रोसोल, फ्रांस में सोनोमात्रा, अमेरिका में एमएसई पावर सिस्टम्स, ब्रिटेन में विद्युत प्रौद्योगिकी समाधान, नेल्को इंडिया में तीन व्यवसाय, स्वीडन में इमोट्रॉन, अमेरिका में क्यूईआई इंक, स्पेन में ज़िव ग्रुप, मलेशिया में सबाह वन उद्योग का अधिग्रहण कर उन्होंने वर्ष 2000 से 2013 तक समूह को मात्र 200 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 20,000 करोड़ रुपये तक पहुँचा दिया है।

गौतम के भाई करण ने होल्डिंग कंपनी करुण कार्पेट्स प्राइवेट लिमिटेड का कार्यभार संभाला, जिसने डीबीएच इंटरनेशनल (काओलिन इंडिया सहित), भारत स्टार्च प्रोडक्ट्स, डीबीएच इन्वेस्टमेंट्स का अधिग्रहण किया और जिसने ग्रीव्स कॉटन , प्रीमियम ट्रांसमिशन, डीबीएच होल्डिंग, ग्रीव्स लीजिंग, डी ग्रीव्स, डीबीएच कंसल्टिंग और एम्पीयर व्हीकल्स का अधिकांश हिस्सा प्राप्त किया।

इंदर मोहन थापर के बेटे विक्रम थापर और पोते वरुण थापर केसीटी समूह की देखरेख करते हैं, जिसमें कलकत्ता स्थित कोयला व्यापार कंपनी केसीटी कोल सेल्स (केसीटी ब्रदर्स) भी शामिल है। विक्रम एम. थापर ने 90 के दशक में वाटरबेस लिमिटेड की शुरुआत की थी, जिसका मुख्य व्यवसाय निर्यात के लिए झींगा पालन सहित मत्स्य पालन था।

जेसीटी मिल्स का एक नामी गिरामी फुटबॉल क्लब JCTFC नाम से था, जिसे 2011 में भंग कर दिया गया था। क्लब ने भारत की शीर्ष स्तरीय लीगों, नेशनल फुटबॉल लीग (भारत) और पंजाब स्टेट सुपर फुटबॉल लीग में प्रतिस्पर्धा की है।

हीरो समूह                                              हीरो समूह भारत के सबसे बड़े और प्रतिष्ठित औद्योगिक घरानों में से एक है जिसकी शुरुआत 1956 में एक साइकिल निर्माता कंपनी के रूप में मुंजाल परिवार के चार भाइयों—दयानंद मुंजाल, सत्यानंद मुंजाल, बृज मोहन लाल मुंजाल और ओम प्रकाश मुंजाल द्वारा की गई थी। कंपनी का नेतृत्व वर्तमान में बृजमोहन लाल मुंजाल के बेटे पवन मुंजाल द्वारा किया जा रहा है।यह समूह मुख्य रूप से ऑटोमोबाइल (दोपहिया वाहन), फाइनेंस, नवीकरणीय ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स और शिक्षा के क्षेत्र में सक्रिय है ।हीरो ग्रुप से जुड़ी प्रमुख कंपनियाँ हीरो मोटोकॉर्प, हीरो साइकिल, हीरो फिनकॉर्प, हीरो फ्यूचर एनर्जीज़, हीरो इलेक्ट्रॉनिक्स, बीएमएल मुंजाल विश्वविद्यालय हैं। समूह की फ्लैगशिप कंपनी हीरो मोटो कॉर्प का बाजार पूंजीकरण लगभग एक लाख करोड़ का है। समूह की मूल कंपनी हीरो साइकिल है। यह और हीरो मोटोकार्प दुनिया की सबसे बड़ी साइकिल व मोटर साइकिल निर्माताओं में से एक है।2010 में परिवार के सदस्यों के बीच विवादों और जटिलताओं से बचने के लिए, मुंजाल परिवार ने अपनी होल्डिंग्स और 20 से अधिक कंपनियों को आपसी सहमति से विभाजित कर लिया था। इस बंटवारे के तहत प्रत्येक पारिवारिक गुट को अपने-अपने व्यावसायिक कार्यक्षेत्रों का स्वतंत्र स्वामित्व और प्रबंधन मिल गया। बृजमोहन लाल मुंजाल हीरो समूह के मुख्य वास्तुकार थे। 2015 में अपने निधन तक वे समूह के चेयरमैन रहे। उनके नेतृत्व में कंपनी ने ‘हीरो होंडा’ के साथ ऐतिहासिक सफलता हासिल की।बृजमोहन लाल के पुत्र पवन मुंजाल वर्तमान में हीरो मोटोकॉर्प के कार्यकारी अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक हैं। वे समूह के सबसे प्रमुख चेहरों में से एक हैं।पवन मुंजाल के भाई सुनील कान्त मुंजाल ‘हीरो एंटरप्राइज’ के चेयरमैन हैं।बृजमोहन लाल के सबसे छोटे भाई ओम प्रकाश (ओ.पी.) मुंजाल  ने ‘हीरो साइकिल्स’ की स्थापना में अहम भूमिका निभाई और इसे दुनिया की सबसे बड़ी साइकिल निर्माता कंपनी बनाया।ओ.पी. मुंजाल के पुत्र पंकज मुंजाल वर्तमान में हीरो साइकिल्स के प्रमुख और चेयरमैन हैं।बृजमोहन लाल के छोटे भाई दयानंद लाल मुंजाल के पुत्र विजय मुंजाल हीरो इलेक्ट्रिक के चेयरमैन हैं। वर्तमान में हीरो इलेक्ट्रिक और हीरो एक्सपोर्ट्स को मिलाकर नई कंपनी हीरो इको का गठन किया है।बृजमोहन लाल मुंजाल के भाई सत्यानंद गुंजल के सुपुत्र पंकज मुंजाल वर्तमान में हीरो साइकिल्स एवं हीरो मोटर्स लिमिटेड के प्रबंध निदेशक एवं अध्यक्ष हैं और मुंजाल शोवा लिमिटेड, मुंजाल किरियू इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड, जेडएफ हीरो चेसिस सिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड, हॉक साइकिल्स प्राइवेट लिमिटेड, यूटी बाइक्स लिमिटेड, फायरफॉक्स बाइक्स प्राइवेट लिमिटेड, मुंजाल हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड, भाग्यडे इन्वेस्टमेंट्स प्राइवेट लिमिटेड, ओपीएम ग्लोबल बीवी और एवोसेट स्पोर्ट्स (यूके) के बोर्ड में निदेशक के रूप में कार्यरत हैं।

हीरो समूह
                                              हीरो समूह भारत के सबसे बड़े और प्रतिष्ठित औद्योगिक घरानों में से एक है जिसकी शुरुआत 1956 में एक साइकिल निर्माता कंपनी के रूप में मुंजाल परिवार के चार भाइयों—दयानंद मुंजाल, सत्यानंद मुंजाल, बृज मोहन लाल मुंजाल और ओम प्रकाश मुंजाल द्वारा की गई थी। कंपनी का नेतृत्व वर्तमान में बृजमोहन लाल मुंजाल के बेटे पवन मुंजाल द्वारा किया जा रहा है।

यह समूह मुख्य रूप से ऑटोमोबाइल (दोपहिया वाहन), फाइनेंस, नवीकरणीय ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स और शिक्षा के क्षेत्र में सक्रिय है ।

हीरो ग्रुप से जुड़ी प्रमुख कंपनियाँ हीरो मोटोकॉर्प, हीरो साइकिल, हीरो फिनकॉर्प, हीरो फ्यूचर एनर्जीज़, हीरो इलेक्ट्रॉनिक्स, बीएमएल मुंजाल विश्वविद्यालय हैं। समूह की फ्लैगशिप कंपनी हीरो मोटो कॉर्प का बाजार पूंजीकरण लगभग एक लाख करोड़ का है। समूह की मूल कंपनी हीरो साइकिल है। यह और हीरो मोटोकार्प दुनिया की सबसे बड़ी साइकिल व मोटर साइकिल निर्माताओं में से एक है।

2010 में परिवार के सदस्यों के बीच विवादों और जटिलताओं से बचने के लिए, मुंजाल परिवार ने अपनी होल्डिंग्स और 20 से अधिक कंपनियों को आपसी सहमति से विभाजित कर लिया था। इस बंटवारे के तहत प्रत्येक पारिवारिक गुट को अपने-अपने व्यावसायिक कार्यक्षेत्रों का स्वतंत्र स्वामित्व और प्रबंधन मिल गया।

बृजमोहन लाल मुंजाल हीरो समूह के मुख्य वास्तुकार थे। 2015 में अपने निधन तक वे समूह के चेयरमैन रहे। उनके नेतृत्व में कंपनी ने ‘हीरो होंडा’ के साथ ऐतिहासिक सफलता हासिल की।

बृजमोहन लाल के पुत्र पवन मुंजाल वर्तमान में हीरो मोटोकॉर्प के कार्यकारी अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक हैं। वे समूह के सबसे प्रमुख चेहरों में से एक हैं।

पवन मुंजाल के भाई सुनील कान्त मुंजाल ‘हीरो एंटरप्राइज’ के चेयरमैन हैं।

बृजमोहन लाल के सबसे छोटे भाई ओम प्रकाश (ओ.पी.) मुंजाल  ने ‘हीरो साइकिल्स’ की स्थापना में अहम भूमिका निभाई और इसे दुनिया की सबसे बड़ी साइकिल निर्माता कंपनी बनाया।

ओ.पी. मुंजाल के पुत्र पंकज मुंजाल वर्तमान में हीरो साइकिल्स के प्रमुख और चेयरमैन हैं।

बृजमोहन लाल के छोटे भाई दयानंद लाल मुंजाल के पुत्र विजय मुंजाल हीरो इलेक्ट्रिक के चेयरमैन हैं। वर्तमान में हीरो इलेक्ट्रिक और हीरो एक्सपोर्ट्स को मिलाकर नई कंपनी हीरो इको का गठन किया है।

बृजमोहन लाल मुंजाल के भाई सत्यानंद गुंजल के सुपुत्र पंकज मुंजाल वर्तमान में हीरो साइकिल्स एवं हीरो मोटर्स लिमिटेड के प्रबंध निदेशक एवं अध्यक्ष हैं और मुंजाल शोवा लिमिटेड, मुंजाल किरियू इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड, जेडएफ हीरो चेसिस सिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड, हॉक साइकिल्स प्राइवेट लिमिटेड, यूटी बाइक्स लिमिटेड, फायरफॉक्स बाइक्स प्राइवेट लिमिटेड, मुंजाल हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड, भाग्यडे इन्वेस्टमेंट्स प्राइवेट लिमिटेड, ओपीएम ग्लोबल बीवी और एवोसेट स्पोर्ट्स (यूके) के बोर्ड में निदेशक के रूप में कार्यरत हैं।