भाई सती दास जी

भाई सती दास जी

भाई सती दास जी सिख इतिहास के एक महान बलिदानी थे। वे सिखों के नौवें गुरु, गुरु तेग बहादुर जी के अनन्य शिष्य थे और उनके साथ अपनी प्राण न्यौछावर कर देने वाले तीन प्रमुख सिखों में से एक थे। अन्य दो भाई मती दास और भाई दयाला जी थे। भाई सती दास का जन्म पंजाब के जंडियाला गांव...
गुरु गोविंद सिंह

गुरु गोविंद सिंह

गुरु गोविंद सिंह जी (22 दिसंबर 1666 – 7 अक्टूबर 1708) सिख धर्म के दसवें और अंतिम मानव गुरु थे। अपने पश्चात् उन्होंने गुरु ग्रंथ साहिब को शाश्वत गुरु के रूप में घोषित किया। गुरु गोविंद सिंह जी का जन्म 22 दिसंबर 1666 को बिहार के पटना में हुआ था। उनके पिता सिखों के नौवें...
भाई बचित्तर सिंह

भाई बचित्तर सिंह

भाई बचित्तर सिंह (6 मई 1664 – दिसंबर 1705) सिख इतिहास के एक महान योद्धा और दसम गुरु, श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के सेनापति थे। उन्हें उनकी अदम्य वीरता और लोहगढ़ के किले की रक्षा के लिए जाना जाता है। भाई बचित्तर सिंह की सबसे प्रसिद्ध गाथा 1 सितंबर 1700 की है, जब आनंदपुर...
बंदा सिंह बहादुर

बंदा सिंह बहादुर

बंदा सिंह बहादुर (1670-1716) उर्फ़/उपाख्य लक्ष्मण देव उर्फ़/उपाख्य लछमन दास उर्फ़/उपाख्य माधो दास बैरागी 27 अक्टूबर 1670 (या 16 अक्टूबर) को वर्तमान जम्मू-कश्मीर के राजौरी में एक राजपूत परिवार में उत्पन्न लक्ष्मण देव छोटी सी आयु में घर छोड़कर वैरागी बन गए नाम हुआ...
महाराजा रणजीत सिंह

महाराजा रणजीत सिंह

“शेरे पंजाब” महाराजा रणजीत सिंह (1780-1839) का जन्म 13 नवंबर 1780 को गुजरांवाला (अब पाकिस्तान में) में हुआ था। बचपन में चेचक के कारण उनकी बाईं आंख की रोशनी चली गई थी। मात्र 12 वर्ष की आयु में पिता महा सिंह के निधन के बाद उन्होंने शुकरचकिया मिसल की कमान...
हरि सिंह नलवा

हरि सिंह नलवा

हरि सिंह नलवा (1791–1837) महाराजा रणजीत सिंह द्वारा स्थापित सिख साम्राज्य की ‘सिख खालसा सेना’ के सबसे महान् और विश्वसनीय सेनापति थे जिनके भय से अफगान, पठान पनाह मांगते थे। हरि सिंह का जन्म 29 अप्रैल, 1791 को पंजाब के माझा क्षेत्र के गुजरांवाला (अब...